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आस्था: भगवान विष्णु देखते हैं मां शीतला की विराट आरती, 16वीं शताब्दी से मानी जाती है आरती की शुरुआत
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Tue, 31 Mar 2026 04:04 PM IST
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सार
Varanasi News: चैत्र मास शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रात में 2:30 बजे माता की आरती परंपरा 14वीं शताब्दी से उल्लेख मिलता है। इस दिन मां के दरबार में 52 जिलों से बधावा आता है।
बड़ी शीतला माता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
काशी में विराजमान सप्तमाात्रिका सिद्धपीठ बड़ी शीतला माता की विराट आरती भगवान विष्णु भी देखते हैं। चैत्र मास शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रात में 2:30 बजे होने वाली इस आरती की शुरुआत 16वीं शताब्दी से मानी जाती है। इस आरती की परंपरा लिंगिया परिवार की 15वीं पीढ़ी निभा रही है।
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इस दिन मां के दरबार में 52 जिलों से बधावा आता है। काशी तमाम परंपराएं और संस्कृतियों से समृद्ध है। वेद-पुराणों और शास्त्रों में युगों से देवों के काशी में मौजूदगी और उनकी परंपराएं दुनिया में अलग है। इसी में बड़ी शीतला माता की विराट आरती की भी परंपरा है।
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मंदिर के महंत और इस आरती की परंपरा को 53 वर्षों से निभा रहे पं. शिव प्रसाद पांडेय लिंगिया ने बताया कि काशी में सिद्धपीठ बड़ी शीतला माता गंगावतरण के पहले से विराजमान हैं। चैत्र मास शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रात में 2:30 बजे माता की आरती परंपरा 14वीं शताब्दी से उल्लेख मिलता है।
माना जाता है कि भगवान विष्णु उस दिन पूरब से पश्चिम दिशा में जाते हैं और इसी वक्त वह आरती में शामिल होकर देखते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि और निरोग का आशीर्वाद देते हैं। उनकी सर्वमनोकामना पूर्ण होती है। बताया कि साल में इसी आरती में माता को स्वर्ण मुखौटा धारण करवाया जाता है। इसी दिन से संगीत महोत्सव की शुरुआत होती है।
इन पीढ़ियों ने निभाई परंपरा
लिंगिया परिवार के भीमराम लिंगिया, आत्माराम, कोदई, दयाराम, रामजी, जगेश्वर, धुरी, कन्हैया, प्रभु पांडेय, लक्ष्मण, परमेश्वर, सूरज प्रसाद, महादेव प्रसाद, भवानी शंकर, शिव प्रसाद पांडेय हैं। शिव प्रसाद के बेटे अभिनाश पांडेय सूट्टू महाराज अगली पीढ़ी होंगे।
108 बाती और 11 किलो कपूर से होती है विराट आरती
बड़ी शीतला माता को 21 किलो दीपक 108 बत्तियां, 21 किलो आरती पात्र में 11 किलो कपूर से आरती होती है। इस दिन माता को 51 किलो दही, दूध, शहद, घी आदि नैवेद्य से शृंगार कर होता है।
108 बाती और 11 किलो कपूर से होती है विराट आरती
बड़ी शीतला माता को 21 किलो दीपक 108 बत्तियां, 21 किलो आरती पात्र में 11 किलो कपूर से आरती होती है। इस दिन माता को 51 किलो दही, दूध, शहद, घी आदि नैवेद्य से शृंगार कर होता है।