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Mahashivaratri 2026: महाशिवरात्रि का मुहूर्त शाम 4:30 बजे से, चारों पहर पूजा का विधान; काशी में तैयारी शुरू

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 04 Feb 2026 03:35 PM IST
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सार

Varanasi News: महाशिवरात्रि को लेकर काशी में तैयारियां शुरू हो गई है। 15 फरवरी को शाम 4:23 बजे पर चतुर्दशी तिथि लग रही। अगले दिन शाम 5:10 बजे रहेगी। 

Mahashivratri 2026 Shubh Muhurat Special preparations at temples in Varanasi
महाशिवरात्रि 2026 - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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काशी पुराधिपति के उपासना का महापर्व महाशिवरात्रि इस वर्ष विशेष अध्यात्म और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 4:23 बजे महाशिवरात्रि का मुहूर्त शुरू हो जाएगा।

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महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक और रात्रिकालीन पूजा का विशेष महत्व होता है। बीएचयू के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रो. विनय पांडेय के अनुसार इस वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 4:23 बजे पर शुरू होकर समापन 16 फरवरी की शाम 5:10 बजे होगी। हालांकि महाशिवरात्रि पर शिव का पूजन और जलाभिषेक रात्रि के चारों प्रहर में करने के विधान हैं।
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इसलिए 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का पर्व पूरे काशी में मनाया जाएगा। इसी कारण काशी के प्रमुख शिवालयों में 15 फरवरी की संध्या से ही विशेष पूजन शुरू हो जाएगा। प्रो. पांडेय के मुताबिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पावन विवाह संपन्न हुआ था। 

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पौराणिक ग्रंथों के अनुसार प्रदोष काल में शिव आराधना से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है, क्योंकि सृष्टि के सृजन और संहार का कार्य महादेव इसी संधिकाल में करते हैं। महाशिवरात्रि पर शिव भोग में भांग, धतूरा, बेलपत्र, दूध और गंगाजल अर्पित करने पर प्रसन्न होते हैं। इस दिन भगवान शिव को जल अर्पित करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

चार पहर की पूजा का महत्व

शास्त्रों में महाशिवरात्रि पर चार पहर की पूजा करने का विशेष विधान होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि पर रात के चारों पहर में भगवान शिव की पूजा-आराधना करने से विशेष फल मिलता है। ऐसी मान्यता है कि चार पहर में पूजा करने से मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन रात भर काशी के शिवालयों में शिव भक्त विशेष पूजा करते हैं। दिन भर बाबा भोलेनाथ को लोग गंगाजल और दूध अर्पित करते हैं। रात में विशेष चार प्रहर की पूजा की जाती है। चार प्रहार में प्रथम प्रहर का समय शाम छह बजे से शुरू होता है। इसके बाद तीन-तीन घंटे के अंतरात पर चारो पहर भोर तीन बजे तक चलते हैं। इस दौरान भगवान शिव का विशेष षोडशोपचार पूजन और रुद्राभिषेक किया जाता है।
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