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यूपी में बनारसी यादव का एनकाउंटर: 23 साल की उम्र में तीन कत्ल, 2003 में पहली चोरी; शूटर की पूरी क्राइम कुंडली

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 04 Feb 2026 01:56 PM IST
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सार

वाराणसी में एसटीएफ ने सारनाथ के कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के मामले में एक लाख के इनामी शूटर बनारसी यादव को मुठभेड़ में मार गिराया। बनारसी यादव ने चोरी से अपराध में कदम रखा और हत्या पर उसका अंत हो गया।

banarasi Yadav Encounter in Up Know Shooter's Criminal History News in Hindi
banarasi Yadav Encounter - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में बनारसी यादव को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है। एक लाख का इनामी शातिर किस्म का अपराधी था। जुर्म, जरायम में सुपारी लेकर हत्या करने में बनारसी यादव का नाम वाराणसी समेत पूर्वाचल में सबसे बड़ा था। 
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2003 में पहली बार चोरी के मुकदमे में गाजीपुर के खानपुर थाने से जेल गए बनारसी ने अपराध की दुनिया में कदम रखा तो फिर आगे ही बढ़ता गया। जेल में बंद रहने के दौरान कुख्यात अपराधियों के शरण में आया। 
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बनारसी यादव ने 23 साल में 3 हत्या और 5 से अधिक हत्या के प्रयास जैसे अपराध को अंजाम दिया। हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद ही उसका अंत हुआ। गाजीपुर और जिलों के बड़े अपराधियों में बनारसी यादव को इतना बड़ा था कि वह सफेदपोशों तक को धमकाता था। 

अपराध के बाद राज्य छोड़ने में माहिर बनारसी यादव के नहीं पकड़े जाने का सबसे बड़ा कारण था कि वह मोबाइल और बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करता था। कालोनाइजर महेंद्र गौतम की गोली मारकर हत्या के बाद उसने मुंबई, कर्नाटक में फरारी काटी थी।

 

पुलिस से बचने के लिए अकेला ही रहता था
बनारसी यादव पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए अकेले ही रहता था। गाजीपुर का घर उसने पिछले कई वर्षों से छोड़ रखा था। उसकी फोटो और पहचान भी मुश्किल थी।

 

एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, बनारसी यादव की गिरफ्तारी को लेकर बहुत जाल बिछाया गया। कई बार वह बचकर भी निकला। सारनाथ के कालोनाइजर महेंद्र गौतम को पहली गोली बनारसी यादव ने मारी थी। उसके बाद अरविंद यादव उर्फ फौजी ने मारी थी। जबकि बाइक विशाल यादव चला रहा था।

कॉलोनाइजर हत्याकांड का सुपारी किलर बनारसी यादव मुठभेड़ में ढेर
एसटीएफ ने सारनाथ के कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के मामले में एक लाख के इनामी शूटर बनारसी यादव को मंगलवार रात चौबेपुर थाना क्षेत्र के बारियासनपुर रिंग रोड पर मुठभेड़ में मार गिराया। वह कॉलोनाइजर की हत्या करके 166 दिन से भागा था। मौके से दो पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं।

क्या है पूरा मामला
गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र के गौरहट निवासी बनारसी पर वाराणसी, गाजीपुर, सोनभद्र समेत अन्य जनपदों में 24 से ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 21 अगस्त 2025 को सिंहपुर में बाइक सवार 3 शूटरों ने बाइक सवार महेंद्र गौतम की गोली मारकर हत्या की थी। कमिश्नरेट पुलिस और एसटीएफ को बनारसी यादव की तलाश थी। 4 जनवरी को दूसरे शूटर गाजीपुर के अरविंद यादव उर्फ फौजी को सारनाथ पुलिस और क्राइम ब्रांच ने मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था। गाजीपुर के तीसरे शूटर विशाल की गिरफ्तारी के लिए दबिश जारी है।

एसटीएफ की वाराणसी इकाई को सूचना मिली कि बनारसी यादव गाजीपुर-वाराणसी हाईवे से कहीं भागने के फिराक में है। संबंधित थाने की फोर्स और एसटीएफ ने घेराबंदी की। चौबेपुर थाना क्षेत्र के बारियासनपुर रिंग रोड के पास घेराबंदी देख बनारसी ने टीम पर फायरिंग कर दी। इस बीच जवाबी फायरिंग में बनारसी को गोली लगी और वह अचेत हो गया। एसटीएफ ने उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

29 बिस्वा जमीन के लिए फैटू ने दी थी सुपारी
महेंद्र गौतम की हत्या की सुपारी पुराने परिचित गाजीपुर निवासी जोगेंद्र यादव उर्फ फैटू ने 60 करोड़ की 29 बिस्वा जमीन के विवाद में बनारसी यादव को दी थी। बनारसी, अरविंद यादव उर्फ फौजी और विशाल तीन शूटरों को दो-दो लाख रुपये और पिस्टल मुहैया कराई गई थी। असलहा बिहार के मुंगेर निवासी मोहम्मद मुकीम ने उपलब्ध कराया था।

बनारसी पर गाजीपुर, वाराणसी और सोनभद्र में सबसे ज्यादा मामले दर्ज
बनारसी यादव के खिलाफ वाराणसी, गाजीपुर और सोनभद्र में सबसे ज्यादा मामले दर्ज थे। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, पहला मामला गाजीपुर के खानपुर थाने में 2003 में दर्ज हुआ था। इसी मामले में पांच और प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

वाराणसी के चोलापुर थाने में भी 2005 से 2006 के बीच चार मामले दर्ज कराए गए थे। सोनभद्र के घोरावल थाने में दो मामले दर्ज हैं। वाराणसी के दूसरे थानों में भी मामला दर्ज हुआ था। सारनाथ थानाक्षेत्र में कॉलोनाइजर की हत्या में उसकी तलाश की जा रही थी। अब मुठभेड़ में मारा गया है।
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