विरोध का नया ट्रेंड: प्रेम- प्रसंग में टावर बना दबाव का हथियार, पूर्वांचल में 9 जिलों में छह माह में 43 घटनाएं
पूर्वांचल में मांग पूरी करवाने के लिए टावर दबाव का मजबूत हथियार बन गया है। नौ जिलों में छह माह में 43 ऐसी घटनाएं हुईं, जिनमें लोग अपनी बात मनवाने के लिए जान की बाजी लगाकर हाईटेंशन लाइन और मोबाइल टावर पर चढ़े।
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विस्तार
पूर्वांचल के नौ जिलों में अपनी मांग मनवाने के लिए लोग मोबाइल और हाईटेंशन लाइन के टावर पर चढ़ रहे हैं। चंदौली, भदोही, गाजीपुर, जौनपुर, बलिया, सोनभद्र, आजमगढ़, मऊ और मिर्जापुर जिलों में बीते छह महीनों में 43 लोग टावर पर चढ़ चुके हैं।
औसतन हर महीने सात लोग अपनी बात मनवाने के लिए जान जोखिम में डाल रहे हैं। ज्यादातर मामले प्रेम-प्रसंग, शादी, पारिवारिक कलह और जमीन विवाद से जुड़े हैं। अधिकांश मामलों में लोगों की मांगें पूरी नहीं हुई, फिर भी परिवार, प्रशासन और विरोधी पक्ष पर दबाव बनाने के लिए टावर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बलिया में 19 अप्रैल को बांसडीह क्षेत्र के देवडीह में किशोरी से बात करवाने के लिए एक किशोर बिजली के टावर पर चढ़ गया। इस मामले में किशोरी की मां की तहरीर पर किशोर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए गाजीपुर में जिला प्रशासन को टावर पर चढ़ने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी करने पड़े हैं।
जौनपुर में 21 मई को बक्शा थाना क्षेत्र के विशेषरपुर (उतरीजपुर) में साईं मंदिर के पास मोबाइल टॉवर पर श्रीप्रकाश यादव (30) अपनी भूमि पैमाइश से असंतुष्ट होकर चढ़ गए थे। करीब सात घंटे बाद वह नीचे उतर रहे थे, लेकिन 40 फीट ऊंचे टावर से गिरने से उनकी मौत हो गई। मिर्जापुर में 20 फरवरी को हथिया फाटक के हिस्ट्रीशीटर जुनैद (26) मोबाइल टावर पर चढ़ गया। उसका कहना था कि उसे घर में सम्मान नहीं मिल रहा था और शादी नहीं हो रही थी। आश्वासन पर वह दो घंटे बाद नीचे उतरा। 7 मार्च को दोबारा टावर पर चढ़कर जुनैद फंदे से लटक गया। मोबाइल और हाईटेंशन लाइन के टॉवर की सुरक्षा के लिए गार्ड की तैनाती का नियम है लेकिन जहां पर ये घटनाएं हुई, वहां पर गार्ड की तैनाती नहीं थी।
इनकी मां हुई पूरी
जौनपुर जिले के खुटहन क्षेत्र के शेख असरखपुर गांव निवासी सतीश कुमार यादव मोबाइल टावर पर चढ़ गए थे। आरोप है कि करीब 400 मीटर लंबा चकमार्ग राजस्व अभिलेखों में दर्ज है लेकिन कुछ चकदारों ने उसे जोतकर अपने खेतों में मिला लिया। सतीश नहर के पास स्थित मोबाइल टावर पर चढ़ गए। करीब तीन घंटे बाद प्रशासन ने चकमार्ग की पैमाइश कराकर जेसीबी से काम शुरू कराया। बाद में सतीश को गिरफ्तार कर लिया गया था।
गाजीपुर जिले में 19 मई को देवली गांव में सरिया के पैसे के विवाद पर संतोष गौड़ मोबाइल टावर पर चढ़ गए थे। संतोष को जब 18 हजार रुपये वापस मिले तो वह दो घंटे बाद टावर से नीचे उतरे। बलिया जिले में 13 अप्रैल को सुखपुरा क्षेत्र के एक गांव में एक युवती प्रेमी से शादी की मांग को लेकर टावर पर चढ़ गई थी। बाद में दोनों परिवारों की सहमति से मंदिर में विवाह कराया गया। मऊ में 22 जून को जमीन पर कब्जा और ई-रिक्शा सीज होने पर अकबरपुर गांव की । सपना सिंह सिविल कोर्ट परिसर की पानी की टंकी पर चढ़ गई। ई-रिक्शा का चालान माफ कर दिया गया।
ये हैं आंकड़े
| जिला | घटनाएं |
| गाजीपुर | 10 |
| जौनपुर | 07 |
| बलिया | 06 |
| मऊ | 05 |
| सोनभद्र | 05 |
| भदोही | 04 |
| चंदौली | 03 |
| मिर्जापुर | 02 |
| आजमगढ़ | 01 |
70% मामले प्रेम प्रसंग से जुड़े
पिछले छह महीनों में टावर पर चढ़ने की 43 घटनाओं में लगभग 70 प्रतिशत मामले प्रेम-प्रसंग और शादी की मांग से जुड़े थे, जबकि 15 प्रतिशत घटनाएं जमीन और राजस्व विवाद से संबंधित रहीं। बाकी मामले पैसों के लेनदेन, नियुक्ति और अन्य समस्याओं से जुड़े रहे। 32 मामलों में पुरुष, जबकि 12 मामलों में महिलाएं अपनी मांग मनवाने के लिए टावर पर चढ़ीं। महिलाओं ने प्रेम विवाह, पति से विवाद और पारिवारिक दबाव होने पर यह कदम उठाया।
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व्यवस्था पर घट रहा भरोसा
महात्मा गांधी सती स्मारक महाविद्यालय गाजीपुर की मनोविज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्वेता का कहना है कि टावर पर चढ़ने की बढ़ती घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पारंपरिक व्यवस्था पर भरोसा खोते जा रहे हैं। कई मामलों में लोग यह मानने लगे हैं कि जब तक कोई सनसनीखेज कदम नहीं उठाया जाएगा, तब तक उनकी बात नहीं सुनी जाएगी।
अधिकारी बोले
जब कोई एक मामला किसी तरह का होता है तो लोगों को लगता है कि यही अपनी बात मनवाने का तरीका है। इससे पुलिस व प्रशासन परेशान होते हैं। अगर वाजिब मांग है तो भी सीधे संपर्क करना चाहिए। यह तरीका अच्छा नहीं है। इसे लोगों को खुद ही समझना होगा। -अभिनव त्यागी, एसपी भदोही