{"_id":"6960ab29f337e57ed700e4d0","slug":"nine-months-after-21-day-protest-at-bhu-student-will-finally-get-admission-to-phd-program-in-varanasi-2026-01-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"BHU: 21 दिन तक चले धरने के नौ महीने बाद छात्र को मिलेगा पीएचडी में दाखिला, पढ़ें- क्या है पूरा मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
BHU: 21 दिन तक चले धरने के नौ महीने बाद छात्र को मिलेगा पीएचडी में दाखिला, पढ़ें- क्या है पूरा मामला
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Fri, 09 Jan 2026 12:46 PM IST
विज्ञापन
सार
Varanasi News: बीएचयू में 21 दिन तक चले धरने के नौ महीने बाद छात्र को पीएचडी में दाखिला मिलेगा। छात्र भास्करादित्य त्रिपाठी को फीस जमा करने की लिंक भी मेल की गई है।
बनारस हिंदी विश्वविद्यालय, BHU
- फोटो : X (@bhupro)
विज्ञापन
विस्तार
बीएचयू में एक छात्र को 21 दिनों के विरोध के नौ महीने बाद एक छात्र को दाखिला देने का फैसला लिया गया है। पिछले सत्र में हिंदी विभाग में अर्चिता सिंह बनाम भास्करादित्य त्रिपाठी मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन का ये फैसला आया है। छात्र भास्करादित्य त्रिपाठी को फीस जमा करने की लिंक भी मेल की गई है। सूत्रों के मुताबिक यूजीसी की कमेटी की जांच के बाद कई अधिकारियों को फटकार भी लगाई गई।
Trending Videos
भास्करादित्य त्रिपाठी का जल्दी से नामांकन करने के आदेश दिए गए हैं जिस पर परीक्षा नियंता कार्यालय की ओर से ये फैसला लिया गया। पीड़ित छात्र भास्करादित्य, छात्र नेता डॉ. मृत्युंजय तिवारी और डॉ. नील दुबे ने मांग की है कि जिम्मेदार प्रोफेसरों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और कमेटी की रिपोर्ट को भी सार्वजनिक किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसे भी पढ़ें; बनारस में बुलडोजर एक्शन: 52 बीघे की प्लॉटिंग को किया गया ध्वस्त, सात के खिलाफ दर्ज कराई प्राथमिकी
बता दें कि पिछले साल ईडब्ल्यूएस श्रेणी में वेटिंग की सीटों को भरने के वरियता क्रम में पहले आने पर अर्चिता सिंह ने दावेदारी की थी, लेकिन समय पर ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र न बन पाने के कारण विवाद खड़ा हो गया। फिर अंडरटेकिंग देने के बावजूद भास्करदित्य को प्रवेश का लिंक भेज दिया गया। लेकिन छात्रा के विरोध के बाद लिंक रोक दिया गया और भास्करादित्य धरने पर बैठ गया। ऐसे में बीएचयू में जातिवाद के आरोप लगने लगे। बाद में यूजीसी द्वारा राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया। कमेटी की रिपोर्ट के बाद भास्कर आदित्य त्रिपाठी को प्रवेश दिया गया।