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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: जल शक्ति मंत्री ने मृतकों को किया नमन, बताया आजादी का महत्व; जुटे लोग

Sun, 16 Aug 2026 10:15 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 16 Aug 2026 10:15 AM IST
सार

वाराणसी में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में विभाजन की त्रासदी को याद किया गया। इस दौरान सिंधी और पंजाबी समाज के लोगों को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने विभाजन के दौरान विस्थापित परिवारों के संघर्ष को याद किया।

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Partition Horrors Remembrance Day Jal Shakti Minister pays tribute deceased and highlights significance
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर जुटे लोग। - फोटो : संवाद

विस्तार

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर सर्किट हाउस सभागार में कार्यक्रम हुआ। इसमें सिंधी और पंजाबी समाज के लोगों को सम्मानित किया गया। जेपी मेहता इंटर कॉलेज से सर्किट हाउस तक मौन जुलूस भी निकाला गया। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।

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मुख्य अतिथि जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और प्रदेश के स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा कि हमें इस घटित त्रासदी से सीख लेते हुए एकजुट रहना होगा। राष्ट्रीय भावना को सर्वोपरि रखते हुए राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को बनाए रखने के लिए सर्वोत्कृष्ट कार्य करना होगा। 
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भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली, लेकिन उसके ठीक एक दिन पहले 14 अगस्त को पाकिस्तान भारत से विभाजित होकर अलग देश बना। इस दौरान दोनों देशों में बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे। इस त्रासदी में मारे गए लोगों की याद में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाता है।

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर सिंधी एवं पंजाबी समाज के तिलक राज कपूर, कमल किशोर वासुदेव, आत्माराम शाडीजा, रमेश लालवानी, रुक्मिणी देवी, हासानंद बदलानी एवं लालचंद रुपानी को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। जेपी मेहता इंटर कॉलेज से सर्किट हाउस तक मौन जुलूस भी निकाला गया। इस मौके पर भाजपा के क्षेत्र अध्यक्ष अशोक चौरसिया, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, जिलाध्यक्ष रामसकल पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मोर्या, मेयर अशोक तिवारी, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र राय, राकेश त्रिपाठी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, विधायक डॉ. अवधेश सिंह मौजूद रहे।

भारत का विभाजन मजहब जनित त्रासदी थी...
काशी विद्यापीठ के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि भारत का विभाजन मजहब जनित त्रासदी थी, इसके घाव कभी भर नहीं पाएंगे। 20 लाख लोगों की हत्या हुई और एक करोड़ 80 लाख लोगों को घर से बेदखल कर दिया गया। अपनी ही जमीन से बेदखल होने का असीमित दर्द आज भले ही इतिहास बन गया हो, लेकिन आज तक भारत के लोग इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। 

जब 711 ई. में अरबों ने पहली बार भारत के सिंध प्रांत पर हमला किया होगा, तब किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक दिन अरबी सोच मजहब के नाम पर इतनी हावी होगी कि देश ही बंट जाएगा। वह विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विशाल भारत संस्थान की ओर से शुक्रवार को सुभाष भवन सभागार में ‘भारत विभाजन का काला अध्याय’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। 

शास्त्री संग्रहालय में लगी छायाचित्र प्रदर्शनी
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर लाल बहादुर शास्त्री स्मृति भवन संग्रहालय में शुक्रवार को विभाजन विभीषिका पर आधारित विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी का शुभारंभ मुख्य अतिथि बीएचयू के सहायक प्रोफेसर डॉ. विनोद कुमार जायसवाल ने किया। डॉ. जायसवाल ने कहा कि भारत का विभाजन अभूतपूर्व मानव विस्थापन और मजबूरी में पलायन की एक दर्दनाक कहानी है। यह ऐसी त्रासदी थी, जिसमें लाखों लोगों को अजनबियों के बीच विपरीत वातावरण में नया आशियाना तलाशना पड़ा। 

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