Rathyatra Mela: तीसरी-चौथी पीढि़यों ने संवारा रथ, भाई-बहन संग रथारूढ़ होंगे प्रभु; पूजने आएंगे लाखों भक्त
Varanasi News: वाराणसी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए 14 पहियों वाला अष्टकोणीय रथ तैयार हो गया है। तीसरी और चौथी पीढ़ी के कारीगरों ने पारंपरिक शैली में रथ को संवारा है। इस बार भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ डोली के बजाय रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।
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काशी के रथयात्रा मेले को उत्सव सरीखा बनाने में कई परिवार का योगदान है। इनमें एक ऐसा परिवार भी है जो भगवान जगन्नाथ के यंत्राकार अष्टकोणीय रथ को संवारने और सजाने से लेकर भोग तक की सेवा में लगा है। वर्तमान में परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी इस सेवा में लगी है।
रथयात्रा मेले में इन्हीं के हाथों से सजे संवरे रथ में भगवान जगन्नाथ भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथारूढ़ होकर भक्तों को दर्शन देंगे। 14 पहिये वाला यह रथ सजकर तैयार हो चुका है। रथ के शिखर पर पीतल के कलश, प्रभु का सुदर्शन चक्र और हनुमान ध्वज लहराएगा। 15 जुलाई को रथ मेला स्थल पर पहुंच जाएगा। डोली को छोड़कर भगवान इसी रथ पर विराजमान होंगे। मेला 16 जुलाई से शुरू होगा।
पुरी के रथ की तरह ही यहां भी भगवान जगन्नाथ का रथ वास्तुकला और शिल्प शास्त्र का बेजोड़ नमूना बना है। प्यारेलाल वर्मा की चौथी पीढ़ी रथ की सेवा कर रही है। वह 40 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। प्यारेलाल वर्मा ने बताया कि प्रभु का रथ करीब-करीब तैयार हो चुका है। सोमवार को फाइनल टच दिया जाएगा। ट्रस्ट श्रीजगन्नाथ जी के सचिव शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि इस बार रथ की सजावट और लाइटिंग को नया स्वरूप दिया गया।
शीशम की लकड़ी से निर्मित इस रथ की संरचना दो तलों में विभाजित है। रथ के प्रथम तल पर पहियों के ठीक ऊपर 14 मजबूत खंभे स्थापित हैं। द्वितीय तल पर प्रभु का अष्टकोणीय गर्भगृह है। रथ की चौड़ाई 21 फीट और ऊंचाई 18 फीट है।
काशी में ऐतिहासिक रथयात्रा मेले की तैयारी अंतिम चरण में है। भगवान जगन्नाथ के अस्वस्थ होने पर अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर में उनको काढ़े का भोग लग रहा है। 14 जुलाई को परवल का जूस और मिठाई आदि का भोग प्रभु को लगाया जाएगा। इसके बाद प्रभु भक्तों को दर्शन देंगे। इस यंत्राकार रथ की साज-सज्जा, लाइटिंग का काम पूरा हो चुका है। आठ सीसीटीवी कैमरे लग चुके हैं।
तीन दिन तक तीन तरह का लगेगा ध्वज : रथयात्रा मेले के तीन दिनों तक भगवान जगन्नाथ का तीन रंग में शृंगार होगा। राग-भोग भी अलग-अलग होगा। पहले दिन प्रभु पितांबरी रूप में दिखेंगे। रथ पर भी इसी रंग का ध्वज लगेगा। दूसरे दिन लाल और अंतिम दिन सफेद रंग का ध्वज होगा और इसी रंग में प्रभु का शृंगार भी होगा। भोग लगाने वाले हलवाई बाबूलाल गुप्ता की तीसरी पीढ़ी प्रभु का भोग तैयार करती है। वह 25 वर्षों से भोग सेवा कर रहे हैं।
प्रभु के रथ में ये है खास
भगवान जगन्नाथ का अष्टकोणीय रथ आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाता है। रथ के ऊपर त्रिकोणीय ध्वज, अष्टकोणीय छतरी, नीले और सफेद रंग के छाते व शंखाकार झंडे, चांदी के डंडे में पांच फीट ऊंचा और तीन फीट लंबा त्रिकोणीय चांदी का ध्वज और सुदर्शन चक्र लगाया गया है। भगवान के रथ में परंपरा और आधुनिकता की झलक दिखाई देती है। 12 तीलियों वाले 14 लोहे के पहिये हैं।
आगे दो पहियों में विशेष स्टीयरिंग, रथ के केंद्र में कांसे से निर्मित सारथी और आगे की ओर रथ खींचते हुए कांसे से बने दो अश्व (घोड़े) हैं। गर्भगृह के मुख्य द्वार पर चांदी के पत्र (चादर) मढ़ी नक्काशी अद्वितीय है। इसके बीच में भगवान श्रीगणेश, रिद्धि-सिद्धि, नीचे सूर्य देव और चंद्र देव की आकृतियां उकेरी गई हैं। द्वार के ऊपर नृत्य मुद्रा में भगवान श्रीकृष्ण की छवि व श्रीविष्णुदेव यंत्र स्थापित हैं।