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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Gyanvapi Setback for Supreme Court mediation Muslim side will not attend 14 July meeting

ज्ञानवापी: सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता पहल को झटका, इस बैठक में शामिल नहीं होगा मुस्लिम पक्ष; जानें खास

Mon, 13 Jul 2026 01:45 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 13 Jul 2026 01:45 PM IST
सार

Varanasi News: मुख्य लोक अदालत से ठीक पहले दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावना तलाशने के लिए 14 जुलाई को वाराणसी के मेडिएशन सेंटर (मध्यस्थता केंद्र) में एक प्रारंभिक बैठक बुलाई गई थी, जिसके लिए दोनों पक्षों को नोटिस भी जारी किए गए थे।

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Gyanvapi Setback for Supreme Court mediation Muslim side will not attend 14 July meeting
वाराणसी कोर्ट। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Gyanvapi Case: ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने की सुप्रीम कोर्ट की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत द्वारा शुरू की गई 'समाधान समारोह-2026' पहल के तहत 14 जुलाई को वाराणसी में होने वाली 'प्री-कंसिलेशन' (पूर्व-सुलह वार्ता) बैठक में शामिल होने से मुस्लिम पक्ष ने साफ इनकार कर दिया है।

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अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी (मुस्लिम पक्ष) के अनुसार, वे इस विवाद को अदालत के बाहर किसी मध्यस्थता या लोक अदालत के जरिए सुलझाने के पक्ष में नहीं हैं और अपनी कानूनी लड़ाई को न्यायालय में ही जारी रखेंगे।
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सुप्रीम कोर्ट ने अपनी 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में देश के कुछ सबसे संवेदनशील धार्मिक और जमीनी विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए 'समाधान समारोह-2026' के तहत विशेष लोक अदालत का गठन किया है। सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मामले को 21 से 23 अगस्त तक चलने वाली विशेष लोक अदालत में भेजने का सुझाव दिया था।
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मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ताओं और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी का रुख इस मामले पर पूरी तरह स्पष्ट है कि हम शांतिपूर्ण समाधान का सम्मान करते हैं, लेकिन ज्ञानवापी जैसे अत्यंत संवेदनशील, मालिकाना हक और पूजा स्थल अधिनियम, 1991 से जुड़े संवैधानिक मामलों का फैसला लोक अदालत या मध्यस्थता से नहीं, बल्कि कोर्ट की नियमित न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होना चाहिए। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वे किसी भी स्थिति में मस्जिद पर अपना दावा नहीं छोड़ेंगे, इसलिए ऐसी वार्ताओं में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

 

हिंदू पक्ष का रुख भी कड़ा
दिलचस्प बात यह है कि इस मध्यस्थता प्रस्ताव को लेकर केवल मुस्लिम पक्ष ही नहीं, बल्कि हिंदू पक्ष की मुख्य वादिनी और पैरोकार भी नाखुश हैं। हिंदू पक्ष का कहना है कि वे किसी भी तरह के 'समझौते' या मध्यस्थता के मूड में नहीं हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट और वजूखाने में मिले कथित 'शिवलिंग' के साक्ष्यों का हवाला देते हुए हिंदू पक्ष का कहना है कि वे कोई बीच का रास्ता नहीं चाहते, बल्कि उन्हें पूरी 'ज्ञानवापी भूमि' पर मंदिर का अधिकार चाहिए।

दोनों ही पक्षों (हिंदू और मुस्लिम) द्वारा सुप्रीम कोर्ट के इस मध्यस्थता फॉर्मूले को खारिज किए जाने के बाद, अब यह साफ हो गया है कि 14 जुलाई की प्रस्तावित बैठक बेनतीजा रहेगी। यह मामला अब विशेष लोक अदालत के दायरे से बाहर होकर वापस नियमित अदालती कार्यवाही और कानूनी दांवपेंचों के जरिए ही तय होगा।

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