UP: 11 दिनों के भीतर गंगा से मिला दूसरा शिवलिंग, डोमरी में बढ़ा कौतूहल; नाग की आकृतियां काफी आकर्षक
UP News: चंदौली से सटे डोमरी क्षेत्र में गंगा नदी से 11 दिनों के भीतर दूसरा शिवलिंग मिलने पर लोगों में कौतूहल बढ़ गया है। नया शिवलिंग पहले मिले शिवलिंग से आकार-प्रकार में काफी मिलता-जुलता है, हालांकि यह वजन और आकार में थोड़ा छोटा है। गंगा से लगातार शिवलिंग मिलने की घटनाएं क्षेत्र में चर्चा और आस्था का विषय बनी हुई हैं।
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Chandauli News: गंगा तट स्थित सूजाबाद-डोमरी क्षेत्र में 11 दिनों के भीतर गुरुवार को गंगा की गोद से दूसरा शिवलिंग मिल गया है। इसके मिलने से क्षेत्र में कौतूहल और चर्चा का माहौल है। खास बात यह है कि मंगलवार को मिले शिवलिंग की आकृति पहले मिले शिवलिंग से काफी हद तक मिलती-जुलती है। दोनों पर नाग की आकृतियां उकेरी गई हैं, हालांकि नया शिवलिंग आकार में अपेक्षाकृत छोटा है। लोग आश्चर्यचकित हैं कि ये शिवलिंग आ कहां से रहे हैं।
5 जून को डोमरी वार्ड संख्या-48 स्थित गंगा तट पर मछुआरों के जाल में करीब दो क्विंटल वजनी शिवलिंग मिला था। उस शिवलिंग को गंगा चबूतरा पर स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई। तब से प्रतिदिन 500 से ज्यादा संख्या में श्रद्धालु वहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसी बीच 16 जून को वहीं गंगा में दूसरा शिवलिंग मिला। स्थानीय लोगों के अनुसार दूसरे शिवलिंग की बनावट भी पहले मिले शिवलिंग से काफी मिलती है।
इसमें भी सर्प की आकृतियां बनी हुई हैं, हालांकि पहले मिले शिवलिंग जैसे ऊपर की ओर बना एक नाग इसमें नहीं है। आकार में छोटा होने के बावजूद इसकी बनावट लोगों को पहले मिले शिवलिंग की तरह दिख रही है। रतनपुर निवासी अचेत कुमार ने बताया कि मंगलवार को गंगा स्नान के दौरान उनकी नजर गंगा में पड़े इस शिवलिंग पर पड़ी। उन्होंने बताया कि इसकी आकृति पहले मिले शिवलिंग से काफी मिलती है। उसे गंगा किनारे ही रखा गया है।
अरघे पर सफेंद सीमेंट के निशान, किसी भवन में होने की आशंका
स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं तो कुछ का मानना है कि शिवलिंग संभवतः किसी पुराने मंदिर या निर्माण स्थल से बहकर यहां पहुंचे होंगे। शिवलिंग पर सफेद सीमेंट जैसे निशान भी दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि यह किसी भवन या संरचना का हिस्सा रहा हो सकता है।
इनसेट : क्या है पूरा मामला
- 5 जून को मछुआरों के जाल में मिला था पहला शिवलिंग
- पहले शिवलिंग का वजन करीब दो क्विंटल बताया गया
- 16 जून को उसी क्षेत्र में मिला दूसरा शिवलिंग
- दोनों शिवलिंगों पर नाग की आकृतियां उकेरी गई हैं
- दूसरा शिवलिंग आकार में छोटा, लेकिन आकृति लगभग समान
तीन या उससे अधिक नागों वाले शिवलिंग को नागेश्वर शिवलिंग कहा जाता है और ऐसे शिवलिंग अत्यंत दुर्लभ माने जाते हैं। ये शिवलिंग काशी के ही हैं और गंगा घाट के किनारे के ही लगते हैं। संभव है कि काशी में किसी निर्माण के दौरान अन्य कारणों से इसे गंगा में विसर्जित या फेंक दिया गया हो। - प्रो.राणा पी.बी.सिंह, काशी की संस्कृति और भूगोल के विशेषज्ञ और पूर्व विभागाध्यक्ष, बीएचयू