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नागपंचमी 2025: शिव के साथ पूजे गए नागदेवता, सर्प भय से मुक्ति के लिए घर से लेकर मंदिरों तक 27वें योग में पूजा

Mon, 17 Aug 2026 12:19 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Mon, 17 Aug 2026 12:19 PM IST
सार

Varanasi News: काशी में सोमवार की सुबह से हर-हर महादेव की गूंज होती रही। सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के एक ही दिन होने के कारण काफी भीड़ रही। वहीं सर्प भय से मुक्ति के लिए घर से लेकर शिव मंदिरों तक नागदेव की पूजा हुई। 

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Snake deities worshipped alongside Lord Shiva on Nag Panchami 2025 in varanasi
सर्प भय से मुक्ति के लिए घर से लेकर शिव मंदिरों तक हुई नागदेव की पूजा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी का पर्व सोमवार को मनाया जा रहा है। सर्प भय से मुक्ति के लिए घर से लेकर शिव मंदिरों तक नागदेव की पूजा की जा रही है। जैतपुरा स्थित नागकूप पर नागदेव के पूजन-अर्चन के लिए सुबह से भीड़ उमड़ी और मेला जैसा माहौल रहा। श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि आज शाम पांच बजे तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू होगी। सोमवार होने से भगवान शिव के साथ नागपंचमी भी मनाई जा रही है। पूजा के लिए चित्रा नक्षत्र और शुभ योग रहेगा। पंचमी के दौरान शिववास कैलाश और अग्निवास पृथ्वी पर रहेगा। शिववास में शिव पूजा और अग्निवास में हवन-पूजन का विशेष महत्व बताया गया है।

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ज्योतिषविदों के अनुसार पंचमी नाग उपासना से संबंधित तिथि है। चित्रा नक्षत्र 18 अगस्त की सुबह 4:58 बजे तक रहेगा। इसका स्वामी मंगल और अधिदेवता त्वष्टा (विश्वकर्मा) माने जाते हैं। चित्रा का संबंध रचना, निर्माण, शिल्प, सौंदर्य, कौशल और किसी वस्तु को व्यवस्थित रूप देने से जोड़ा जाता है। शुभ योग 18 अगस्त की भोर 3:29 बजे तक रहेगा। 27वां नित्य योग बन रहा है। चंद्रमा कन्या राशि में शाम 4:19 बजे तक रहेंगे। इसके बाद तुला राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य सुबह 8:04 बजे सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके कारण इसी दिन सिंह संक्रांति भी होगी।
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श्रावण सोमवार को भगवान शिव की आराधना, जलाभिषेक, बिल्वपत्र अर्पण, महामृत्युंजय मंत्र तथा पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करना चाहिए। नागपंचमी और श्रावण सोमवार का संयोग कुछ वर्षों बाद पड़ रहा है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर घर-परिवार को विषैले जीवों और अनजाने भय से सुरक्षा मिलती है। शास्त्रों में नागों को दूध से स्नान कराने की बात कही गई है। इस दिन नवनाग की पूजा की जाती है। पौराणिक स्थल नागकूप पर सुबह से रात तक दर्शन-पूजन और जलाभिषेक के लिए भीड़ उमड़ेगी। मान्यता है कि नागपंचमी पर पूजन-अर्चन से जन्मकुंडली के सर्पदोष का निवारण होता है।

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