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UP: शस्त्र लाइसेंस के तीन केस में पांच मृतकों को बनाया आरोपी, अफजाल अंसारी ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

Mon, 17 Aug 2026 10:36 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर। Published by: Pragati Chand Updated Mon, 17 Aug 2026 10:36 AM IST
सार

Ghazipur News: सपा सांसद अफजाल अंसारी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने शस्त्र लाइसेंस की तीन प्राथमिकी में पांच मृतकों को आरोपी बनाया। 

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Afzal Ansari protested against police action of naming five deceased individual accused in arms license cases
अफजाल अंसारी, सपा सांसद गाजीपुर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गाजीपुर में शस्त्र लाइसेंस के मामले में दर्ज तीन प्राथमिकी को लेकर गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी ने रविवार को पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। सांसद का दावा है कि 22, 25 और 27 जुलाई को दर्ज तीनों प्राथमिकी में पांच ऐसे लोगों को सहअभियुक्त बनाया गया है, जिनकी पहले ही मौत हो चुकी है। प्राथमिकी दर्ज करने से पहले पुलिस ने यह तक सत्यापित नहीं किया कि आरोपी जीवित हैं या नहीं। 

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अफजाल ने कहा कि तीनों प्राथमिकी में आरोप लगभग एक जैसे हैं। इनमें तत्कालीन शस्त्र लिपिक समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। उनके मुताबिक, पहली प्राथमिकी में नामजद दोनों लोगों की मौत हो चुकी है। दूसरी प्राथमिकी में भी दोनों सहअभियुक्त मृत हैं, जबकि तीसरी प्राथमिकी में भी एक मृत व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है।

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1983-87 की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड पर भी सवाल
सांसद ने कहा कि मुकदमे में 1983 से 1987 के बीच राइफल की खरीद-बिक्री का जिक्र है, लेकिन संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। एक राइफल अरुणाचल प्रदेश में बेचे जाने और वहीं से दूसरी खरीदने की बात कही गई है। सत्यापन के लिए पुलिस टीम वहां गई तो संबंधित फर्म के संचालक ने बताया कि वर्ष 2001 में बाजार में आग लगने से उसके सभी रिकॉर्ड जल गए थे। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ने भी आग की घटना की पुष्टि की थी।

बोले- लाइसेंस के कस्टोडियन डीएम, मैं नहीं
सांसद ने कहा कि शस्त्र लाइसेंस का कस्टोडियन जिलाधिकारी होता है, वह स्वयं नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक वजहों से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और चुनाव के दौरान उन्हें सक्रिय होने से रोकने के लिए मुकदमों का सहारा लिया गया। सांसद ने कहा कि अब जब संबंधित लोगों के मृत्यु प्रमाणपत्र सामने आ चुके हैं, तो पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने पूरे मामले को लेकर सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी तंज कसा।
 
किसी भी मामले में किसी व्यक्ति का नाम सामने आने पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज करती है। जांच व विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आता है कि आरोपी की मृत्यु हो गई है तो उसके खिलाफ विवेचना बंद कर कोर्ट को सूचित कर दिया जाता है। -डॉ. ईरज राजा, पुलिस अधीक्षक  

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