UP PCS Result: बनारस-बीएचयू के 10 मेधावी चयनित, गोल्ड मेडलिस्ट अनन्या की दूसरी रैंक; पढ़ें- सफलता की कहानी
Varanasi News: यूपी-पीसीएस में बनारस-बीएचयू के 10 मेधावियों का चयन हुआ। इनमें दो को मामा ने पढ़ाया। वहीं बीएचयू की गोल्ड मेडलिस्ट अनन्या की दूसरी रैंक आई।
विस्तार
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित पीसीएस-2024 में बीएचयू सहित पूरे जिले भर से 10 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इनमें दो की पढ़ाई उनके मामा ने कराई तो कुछ के भाइयों ने उन्हें प्रेरित किया और पढ़ाया। किसी के जीवन का एक तिहाई समय तैयारी में निकल गया तो एक छात्र को अच्छी परवरिश देने के साथ ही तैयारियों का पूरा खर्च भी मामा ने उठाया। यूपी-पीसीएस में दूसरी रैंक पाने वाली रायबरेली की अनन्या त्रिवेदी ने बीएचयू से पढ़ाई की।
अनन्या त्रिवेदी ने 2019 में समाजशास्त्र विभाग से स्नातक किया था। वो बीएचयू की गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं। अब आगे वह यूपीएससी की आईएएस परीक्षा में प्रयास करेंगी। पिता सुशील त्रिवेदी की रायबरेली में जनरल स्टोर की दुकान भी है। अनन्या ने बताया कि पहली बार पीसीएस मेंस और इंटरव्यू का सामना किया। ये सफलता पाना किसी सपने से कम नहीं है। दूसरी रैंक मिलेगी ये तो उम्मीद ही नहीं थी। इसका श्रेय माता-पिता और मामा को है। मामा ने ही उन्हें पढ़ाया। अनन्या का कहना है कि उन्हें जो भी पद मिलेगा उसकी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगी।
आराजीलाइन की सुधा को मिली 10वीं रैंक, एआरटीओ बनीं
आराजीलाइन विकास खंड के कुंडरिया गांव की होनहार बेटी सुधा को यूपी-पीसीएस परीक्षा में 10वीं रैंक मिली। उनका एआरटीओ के पद पर चयन हुआ है। सुधा की प्रारंभिक शिक्षा गांव के परिषदीय विद्यालय से ही हुई। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा संजय मेमोरियल विमेंस कॉलेज से प्राप्त की। सीमित संसाधनों के बावजूद सुधा का चयन गांव में चर्चा का विषय बना रहा। इससे पहले वर्ष 2021 में उनका चयन आरओ (राजस्व अधिकारी) पद पर हुआ था। मगर नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। वर्ष 2023 में उन्होंने डिप्टी जेलर की परीक्षा भी उत्तीर्ण की, लेकिन अपने पीसीएस के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। पांच साल के बाद सुधा का चयन सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी पद के लिए हुआ। सुधा के पिता प्रमोद सिंह (बब्बू) एक किसान हैं, जबकि माता बेबी सिंह गृहिणी हैं।
इसे भी पढ़ें; UP: भीषण हादसे में मां-बेटे समेत तीन की मौत, खून से लाल हुई सड़क, शवों के उड़ गए चिथड़े; मंजर देख कांप उठा दिल
पहले ही प्रयास में 40वीं रैंक हासिल कर डिप्टी जेलर पद पर चयनित होने की सूचना पाते ही महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्र रहे अमन प्रजापति काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने पहुंच गए। अमन दिन का एक तिहाई समय अपने सेल्फ स्टडी को ही देते थे। राजातालाब के असवारी गांव के रहने वाले अमन प्रजापति ने विद्यापीठ से बीएससी करने के बाद चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से बीएड किया। उसके बाद दो साल से दिल्ली में रहकर तैयारी की। अमन के पिता संजय रोजगार कार्यालय मिर्जापुर में वरिष्ठ सहायक हैं। अमन की एक बहन बीएड और दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है। अमन ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया।
बरेका के जेई एलएस इंस्पेक्शन आरके दुबे के बेटे अंकित दुबे को यूपी-पीसीएस में होमगार्ड विभाग में जिला कमांडेंट पद मिला है। इस पद के लिए सिर्फ दो ही चयन हुए हैं। अंकित ने केंद्रीय विद्यालय बरेका से 12वीं तक की पढ़ाई करने के बाद एनआईटी दुर्गापुर से बीटेक किया। उसके बाद तैयारी शुरू कर दी। मूल रूप से मिर्जापुर जनपद के तोसवा चुनार के रहने वाले हैं। कर्मचारी परिषद के संयुक्त सचिव प्रदीप यादव और पूर्व संयुक्त सचिव बीडी दुबे ने घर पहुंचकर बधाई दी।
बीएचयू से 2007 में विज्ञान संस्थान से स्नातक और विद्यापीठ से एमएसडब्ल्यू कर चुके हरीशंकर सिंह को 253वीं रैंक मिली है। 2018 तक उन्होंने पत्रकारिता की। नायाब तहसीलदार के पद पर चयन हुआ। बनारस के पांडेयपुर में रहने वाले हरीशंकर ने बताया कि कभी किसी कोचिंग की मदद नहीं ली। ये तीसरा मेंस और पहला इंटरव्यू था। बीते पांच-छह साल में कई बार असफलता मिली लेकिन अब चयन हो गया। हरीशंकर मूल तौर पर आजमगढ़ के चौकी खेरा गांव के निवासी हैं। पिता का नाम लाल बहादुर सिंह है।
बीएचयू के पूर्व छात्र अखिल पांडेय सहायक आयुक्त (वाणिज्य कर) पद चयनित हुए। इस पद के लिए उनकी पहली रैंक है। 24वर्षीय अखिल पांडेय मूल तौर पर आजमगढ़ के रहने वाले हैं और इन दिनों वर्तमान में वाराणसी में रहकर तैयारी में जुटे थे। सहायक आयुक्त के लिए अखिल की पहली रैंक और ओवरऑल 55वीं रैंक है। बीएचयू से अखिल ने बीकॉम की शिक्षा ली। उसके बाद से ही तैयारी में जुटे रहे।
कोरौता गांव के विकास पटेल व्यापार कर में असिस्टेंट कमिश्नर बने। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई कोरोता गांव के ही जय पब्लिक स्कूल से हुई। इसके बाद गाजियाबाद से साॅफ्टवेयर इंजीनियरिंग में बीटेक किया। तब से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में ही जुटे रहे।
बीएचयू के पूर्व छात्र भानू प्रताप का पीसीएस में नायाब तहसीलदार पद पर चयन हुआ है। बीएचयू के राजनीति विज्ञान विभाग से स्नातक किया। उसके बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए। भानू ने बताया कि 2006 में पिताजी की आकस्मिक मौत के बाद सबकुछ खत्म होने की कगार पर था, लेकिन मामा रत्नेश प्रताप सहारा बनकर उभरे और उन्होंने हमारी जिंदगी संवारने के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। खूब पढ़ाया और बेहतर रहन-सहन व अच्छी परवरिश दी। मां ने इस संघर्ष यात्रा को आगे बढ़ाया। भानू ने कहा कि मां और मामा के अलावा बीएचयू के आचार्य नरेंद्र देव छात्रावास ने बड़ा योगदान दिया। इसने मुझमें रचनात्मकता, आलोचनात्मक और तार्किक सोच तैयार की।
चंदौली की कंचन को दूसरे प्रयास में असिस्टेंट कमिश्नर वाणिज्य कर पद के लिए नौवीं रैंक मिली है। प्रारंभिक शिक्षा जिले के केंद्रीय विद्यालय से करने के बाद बीएचयू से 2019 में अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसी दाैरान कंचन ने सिविल सेवा में आने का लक्ष्य बना लिया था। 2022 में उपाधि लेने के बाद पूरी तरह से तैयारी में जुट गईं। कंचन ने बताया कि उन्होंने नियमित 8-9 घंटे की पढ़ाई की लेकिन मूड फ्रेश के लिए बीच-बीच में ब्रेक भी लिया। कंचन के पिता नरेश कुमार और माता वंदना देवी ने उनकी पढ़ाई और तैयारी में हर संभव मदद की।
बीएचयू से स्नातक कर चुकीं गोंडा के तरबगंज तहसील निवासी 25 वर्षीय वर्षा सिंह की प्रदेश में 53वीं रैंक है। उनका वाणिज्य कर अधिकारी के पद पर चयन हुआ है। पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर चुकीं वर्षा के पिता उमानाथ सिंह का निधन हो गया तो माता प्रेम कुमारी सिंह ने अकेले ही पढ़ाकर तैयारी करवाई।
बीएचयू की शोध छात्रा नेहा बनीं नायब तहसीलदार
बीएचयू की शोध छात्रा और गाजीपुर की नेहा राय का नायब तहसीलदार के पद पर चयन हुआ। राजनीति विज्ञान से यूजी, जेएनयू से पीजी और वर्तमान में बीएचयू से ही पीएचडी कर रही हैं और डॉ. अभय कुमार पीएचडी गाइड हैं। नेहा ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ ही भाई अमीश राय को दिया।