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UP Roadways: महिला परिचालकों को नहीं भायी नौकरी, 10 महीने में 58 फीसदी ने छोड़ी नौकरी; वजह जान लें
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Thu, 12 Mar 2026 12:18 PM IST
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सार
Varanasi News: रोडवेज बसों में परिचालक पद महिलाओं को नहीं भा रही है। यही वजह है कि 10 महीने में 58 फीसदी महिला परिचालकों ने नौकरी छोड़ दी।
महिला परिचालक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रोडवेज बसों में परिचालक पद के लिए महिलाओं का चयन किया जा रहा है, लेकिन कई महिलाओं के लिए यह नौकरी टिकाऊ नहीं साबित हो रही। बीते 10 महीनों में रोडवेज की ओर से आयोजित पांच रोजगार मेलों में 130 महिला परिचालकों की भर्ती हुई थी, जबकि वर्तमान समय में यह संख्या घटकर सिर्फ 54 रह गई है। यानी 58 प्रतिशत ने नौकरी छोड़ दी है।
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महिला परिचालकों के अनुसार, इसका प्रमुख कारण सीमित मानदेय के मुकाबले काम का अत्यधिक दबाव और पारिवारिक जिम्मेदारियां हैं। परिवहन निगम ने कैंट, काशी, वाराणसी (ग्रामीण), चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, सोनभद्र और विंध्य नगर डिपो में पिछले वर्ष फरवरी से संविदा पर महिला परिचालकों की भर्ती शुरू की थी। इन्हें प्रति किलोमीटर 2.02 रुपये के मानदेय पर तैनात किया गया।
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पिछले साल अप्रैल में कैंट बस अड्डा स्थित क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय में आयोजित रोजगार मेले में भी महिला परिचालकों की भर्ती हुई। वहीं, 2026 के जनवरी तक आयोजित पांच रोजगार मेलों में कुल 130 महिलाओं की नियुक्ति हुई। हालांकि, पहली भर्ती के कुछ समय बाद ही कई महिला परिचालकों ने नौकरी छोड़ दी। वर्तमान समय में केवल 54 संविदा महिला परिचालक कार्यरत हैं। पिछले दिनों रोजगार मेले में खासी संख्या में महिलाएं परिचारक की नौकरी पाने के लिए पहुंची थीं।