Varanasi: काशी विश्वनाथ धाम की तरह चमकेगा मणिकर्णिका तीर्थ कॉरिडोर, मिलेंगी ये खास सुविधाएं
मणिकर्णिका घाट को तीन भागों में विकसित करने की तैयारी में है। पहला विजिटर ब्लाॅक होगा। यहां जनसुविधाओं के लिए शौचालय, स्नानगृह, विश्राम कक्ष होंगे। दूसरे भाग में शवदाह गृह बनाए जाएंगे। इसी परिसर में छत पर शवदाह की सुविधा होगी। ताकि बाढ़ आदि के समय भी शवदाह की प्रक्रिया अनवरत जारी रहे। तीसरे भाग में दत्तात्रेय पादुका से तारकेश्वर महादेव मंदिर के परिसर को संवारा जाएगा।
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मोक्षनगरी काशी में सुरसरि तट पर दमक रहे काशी विश्वनाथ धाम की तरह ही अब मणिकर्णिका तीर्थ भी चमकेगा। मणिकर्णिका घाट पर विष्णु पादुका, चक्रपुष्करणी तीर्थ और पूरे परिसर के मंदिरों की शृंखला को संरक्षित किया जाएगा। 17 करोड़ रुपये की मणिकर्णिका तीर्थ परियोजना को नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) की मंजूरी मिल गई है। इसमें जलासेन घाट से सिंधिया घाट के पूरे परिसर को कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना का काम जून के अंतिम सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है।
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काशी विश्वनाथ धाम की बाईं ओर स्थित मणिकर्णिका तीर्थ परिसर को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा। इसमें सड़क से प्रवेश करने वाले मुख्य द्वार को भव्य बनाया जाएगा। घाट से लेकर मंदिर शृंखला तक की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया जाएगा। यहां घाट पर आने वाले श्रद्धालु, पर्यटक और अन्य लोगों के पंजीकरण की व्यवस्था होगी। घाट परिसर स्थित विष्णु पादुका, चक्रपुष्करणी तीर्थ, दत्तात्रेय पादुका, तारकेश्वर और रत्नेश्वर महादेव मंदिर को शृंखलाबद्ध कर कॉरिडोर में समाहित किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे परिसर को हाई रिजॉल्यूशन के सीसी कैमरों से लैस किया जाएगा।
मणिकर्णिका तीर्थ का महात्म्य हिंदू धर्मावलंबियों में बेहद पवित्र है। महाशिवरात्रि और अधिमास में होने वाली पंचक्रोशी परिक्रमा का संकल्प चक्रपुष्करणी तीर्थ पर लिया जाता है। महाशिवरात्रि पर करीब दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु इस घाट पर स्नान के बाद अपनी यात्रा शुरू करते हैं। घाट पर शवदाह की व्यवस्था है और पूरे पूर्वांचल के लोग अंतिम संस्कार के लिए यहां आते हैं। यहां 24 घंटे चिता जलती है। रोजाना पांच हजार से ज्यादा लोग इस काम के लिए यहां आते हैं।
तीन भाग में विकसित होगा घाट
मणिकर्णिका घाट को तीन भागों में विकसित करने की तैयारी में है। पहला विजिटर ब्लाॅक होगा। यहां जनसुविधाओं के लिए शौचालय, स्नानगृह, विश्राम कक्ष होंगे। दूसरे भाग में शवदाह गृह बनाए जाएंगे। इसी परिसर में छत पर शवदाह की सुविधा होगी। ताकि बाढ़ आदि के समय भी शवदाह की प्रक्रिया अनवरत जारी रहे। तीसरे भाग में दत्तात्रेय पादुका से तारकेश्वर महादेव मंदिर के परिसर को संवारा जाएगा।
प्रशासन और दमकल की निगरानी में रहेगा पूरा परिसर
इस परियोजना में सबसे अहम बात यह है कि इस काॅरिडोर में स्मार्ट कंट्रोल रूम बनाया जाएगा और वह नगर निगम के कमांड कंट्रोल सिस्टम से सीधा जुड़ा रहेगा। कमांड कंट्रोल सिस्टम की मदद से जिला प्रशासन, नगर निगम और दमकल विभाग की निगरानी में ये पूरा परिसर रहेगा।
लकड़ी के टाल हटेंगे, बनेंगी सुव्यवस्थित दुकानें
मणिकर्णिका घाट पर लकड़ी के लगे बड़े बड़े टाल की जगह वहां काशी विश्वनाथ धाम की तरह इंपोरियम बनाया जाएगा। इन दुकानदाराें को गोदाम की भी व्यवस्था होगी।
एक नजर में मणिकर्णिका घाट
मृत्यु और मोक्ष वाले इस घाट पर 365 दिन 24 घंटे शवदाह होता है।
प्रतिदिन 250 से 300 शवदाह और पांच हजार लोग घाट पर आते हैं।
पंचक्रोशी परिक्रमा के लिए एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु जुटते हैं।
इन सुविधाओं से बदलेगी घाट की सूरत
- प्रवेश द्वार का विकास, छत तक पहुंचने के लिए रैंप का निर्माण
- व्यूइंग गैलरी, प्रतीक्षा कक्ष, घाट का विस्तार और जनसुविधाएं
- कचरा निस्तारण केंद्र, सीसी कैमरे से पूरे परिसर की निगरानी
मणिकर्णिका घाट के सुंदरीकरण की परियोजना पर जल्द काम शुरू किया जाएगा। इस पूरे घाट का कायाकल्पप सीएमआर के तहत किया जाएगा। - कौशल राज शर्मा, मंडलायुक्त