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Varanasi News: बनारसी सेवईं के दुबई और इंडोनेशिया में भी दीवाने, सालाना 150 करोड़ का है कारोबार

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Mon, 09 Feb 2026 12:20 AM IST
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सार

Varanasi News: व्यापारियों के अनुसार, इस कुटीर उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 800 से अधिक लोग जुड़े हुए हैं, जो पीढ़ियों से इस हुनर को संजोए हुए हैं।

Varanasi News Banarasi vermicelli fans in Dubai and Indonesia too business is worth 150 crore rupees annually
बाल से भी पतली होती है बनारसी सेवईं। - फोटो : संवाद
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विस्तार

काशी में बने सेवईं का स्वाद देश के लोगों के साथ ही खाड़ी देशों दुबई, ईरान, ईराक, इंडोनेशिया, ओमान के लोगों को पसंद आ रहा है। रमजान की तैयारियों के बीच मुस्लिम देशों से सेवईं की डिमांड करीब डेढ़ गुना तक बढ़ गई है।

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उत्पादकों और कारोबारियों के मुताबिक, बनारसी सेवईं से सालाना करीब 150 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है। राजघाट क्षेत्र का भदऊचुंगी इलाका इस कारोबार की धड़कन माना जाता है। यहां के लगभग 65 घरों में सेवईं की पूरी मंडी बसती है। इन्ही संकरी गलियों में स्थित छोटे-बड़े कारखानों में दिन-रात मशीनों की गूंज सुनाई देती है। 
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रमजान का महीना सेवईं के इस कारोबार के लिए 'गोल्डन पीरियड' साबित होता है। व्यापारी सचिन कुमार बताते हैं कि महज रमजान के एक महीने के भीतर सेवईं का टर्नओवर 20 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाता है। यहां बनने वाली लच्छा सेवईं, किमामी सेवईं और दूधफेनी की मांग इतनी अधिक है कि कारखानों में एडवांस बुकिंग चलती है। स्थानीय स्तर पर सप्लाई के साथ-साथ यहां से माल सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए पैक किया जाता है।

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सेवईं बनाता कर्मचारी। - फोटो : संवाद

बाल से भी पतली होती है बनारसी सेवईं
व्यापारियों का कहना है कि यहां की सेवईं की शुद्धता और बारीक बनावट ही इसकी सबसे बड़ी खासियत है, जिसके कारण दुबई, मस्कट और जकार्ता जैसे शहरों में बैठे प्रवासी भारतीय और स्थानीय लोग इसे बेहद पसंद करते हैं। इसकी एक और खासियत यह है कि अन्य सेवईयां मोटी होती हैं, लेकिन बनारसी सेवईं इंसान के बाल से भी पतली होती है।

विदेशों के अलावा यूपी, बिहार में जबरदस्त सप्लाई
सेवईं व्यापार मंडल के अध्यक्ष सच्चे लाल बताते हैं कि होली, रमजान और अन्य त्योहारों पर खाद्य पदार्थों में सेवईं की मांग अत्यधिक बढ़ जाती है। विदेशों के अलावा यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और मुंबई में सप्लाई जाती है। इसके अलावा पूर्वांचल के चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र और जौनपुर में इसकी जबरदस्त डिमांड रहती है। मुंबई सेवईं का सबसे बड़ा खरीददार है। यहां के व्यापारी बनारस से थोक भाव में सेवईं खरीदकर अन्य देशों में सप्लाई जाती है।

इन जायकेदार सेवईयों की अधिक डिमांड : किमामी, नवाबी, शीर खुरमा, लच्छा, सूखी मीठी, दूध वाली, फेनी।

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