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Varanasi News: शिकायतों में आरोपों की बौछार, विवेचना में 40% निकले झूठे, 10% मामलों में सुलह; जानें अपडेट

रवि प्रकाश सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 04 May 2026 02:54 PM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी में महिला थाना, काउंसिलिंग सेंटर, महिला आयोग और एडीसीपी कार्यालय में एक साल में 2100 मामले पहुंचे। छेड़खानी, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और रंगदारी जैसे आरोप शामिल रहे। 

Varanasi News Barrage of Allegations Complaints—40% Found False During Investigation 10% Cases Settled
UP police - फोटो : एआई
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विस्तार

Varanasi Crime: मारपीट, घरेलू हिंसा और रंजिशन मारपीट में तहरीर में बढ़ाचढ़ा शिकायत दर्ज कराने के मामले में पुलिस की विवेचना में 40 प्रतिशत मामले झूठे मिले। खासतौर पर मारपीट जैसे मामलों में गंभीर धाराएं जोड़ते हुए लूट, छेड़खानी और रंगदारी के आरोप लगाए गए, जो जांच के दौरान टिक नहीं पाए। इससे न सिर्फ पुलिस पर अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है, बल्कि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। 

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महिला थाना, काउंसिलिंग सेंटर, महिला आयोग और एडीसीपी कार्यालय में 2100 से ज्यादा मामले एक साल में आए जिसमें विवेचना के बाद बहुत से मामले फर्जी निकले। छह महीने में 81 ऐसे मारपीट के मामले सामने आए जिसमें चेन व नकदी लूटने का आरोप लगा। जो बाद में झूठे निकले। जो मामले कोर्ट में पहुंचे उसमें 10 प्रतिशत में सुलह हुए। 

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में रंजिश, जमीन विवाद या पारिवारिक तनाव के चलते आरोपों को गंभीर रूप दिया जाता है। मारपीट की साधारण घटनाओं को लूट या रंगदारी में बदलकर पेश किया जाता है, ताकि विपक्षी पक्ष पर दबाव बनाया जा सके। विवेचना के दौरान जब साक्ष्य जुटाए जाते हैं, तो इन आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाती। घरेलू कलह से जुड़े मामलों में भी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हो रही हैं। एक वर्ष में 800 शिकायतें ऐसी आईं, जिनमें दहेज उत्पीड़न या पारिवारिक हिंसा व अवैध संबंध का आरोप लगाया गया। 

हालांकि, काउंसिलिंग के बाद शिकायतकर्ताओं ने आरोप वापस ले लिए। जांच में सामने आया कि कई मामलों में गुस्से या आवेश में शिकायत दर्ज कराई गई। जिसे बाद में सुलह के बाद खत्म कर दिया जाता है।

जांच और काउंसिलिंग के बाद सामने आया कि मामलों में बड़ी संख्या रंजिश या पारिवारिक विवाद से प्रेरित थी। ऐसे मामलों में साक्ष्य के आधार पर सख्ती से कार्रवाई करने की दिशा में काम कर रही है। काउंसिलिंग की भूमिका भी अहम साबित हो रही है, जिससे कई पारिवारिक विवाद अदालत तक पहुंचने से पहले ही सुलझ जा रहे हैं।

महिला अपराध मामलों को गंभीरता से लिया जाता है। निष्पक्ष व गुणवत्तापूर्ण विवेचना कराई जा रही है। बहुत से ऐसे मामले हैं जिसमें दहेज उत्पीड़न, मारपीट या हिंसा या छेड़खानी के आते हैं जो जांच के बाद गलत साबित होते हैं। ऐसे में दोनों पक्षों को बुलाकर काउंसिलिंग कराकर मामला समाप्त कराया गया। - नमृता श्रीवास्तव, एडीसीपी महिला अपराध

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