दरभंगा के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में 31 जनवरी को हुई मारपीट की घटना को लेकर मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) थाने में 70 नामजद और 100-150 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, पुलिस इस पहलू की भी गंभीरता से जांच कर रही है कि एफआईआर में कुछ ऐसे लोगों को भी आरोपी बनाया गया है, जो दिल्ली समेत अन्य राज्यों में रहकर नौकरी कर रहे हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्राथमिकी में गांव के बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोगों को आरोपी बनाए जाने के कारण मामले की निष्पक्षता को लेकर भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की बारीकी से जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राजनीति भी हुई तेज
इस घटना को लेकर अब सियासी गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। बुधवार को अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष मृणाल पासवान डीएमसीएच पहुंचे, जहां उन्होंने इलाजरत पीड़ितों से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने जिला कल्याण पदाधिकारी से मिलकर पीड़ितों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने को लेकर चर्चा की।
पीड़ित का आरोप
पीड़ित विक्रम पासवान ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि वह सब्जी खरीदकर घर लौट रहे थे, तभी गांव के लोगों ने जातिसूचक गालियां देते हुए उन पर जानलेवा हमला किया। आरोप है कि हमलावर लाठी-डंडा, लोहे की रॉड, फरसा, दबिया, ईंट-पत्थर जैसे हथियारों से लैस थे और एक राय होकर हमला किया गया, जिसमें कई लोग घायल हो गए। पीड़ित पक्ष का दावा है कि इस मामले में लगभग पूरे गांव को आरोपी बना दिया गया है।
निर्दोषों को फंसाने का आरोप
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मामूली पैसे के लेन-देन से शुरू हुआ विवाद अब गलत दिशा में जा रहा है। उनका आरोप है कि प्राथमिकी में वास्तविक दोषियों को छोड़कर कई निर्दोष लोगों को नामजद कर दिया गया है।
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प्रशासन का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग अध्यक्ष मृणाल पासवान के साथ प्रखंड कल्याण पदाधिकारी कुशेश्वरस्थान प्रिंस कुमार, एससी-एसटी थाना अध्यक्ष ज्वाला चौपाल, कुशेश्वरस्थान थाना प्रभारी अंकित चौधरी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि पीड़ित परिवारों से मिले। अधिकारियों को पीड़ित आठ दलित परिवारों के बैंक खाते और आधार कार्ड की प्रतिलिपि सौंप दी गई है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत देय मुआवजा शीघ्र उपलब्ध कराया जाएगा।
घटना के अगले ही दिन समाजसेवी सुनीति रंजन दास और चुन्नू पासवान द्वारा अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग को लिखित शिकायत भेजी गई थी। इसके बाद आयोग की टीम दरभंगा पहुंची और डीएमसीएच में इलाजरत पीड़ितों से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली।