बाढ़ अनुमंडल के पंडारक प्रखंड स्थित ढीवर गांव निवासी इस्तित्व आनंद ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 50वां स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी इस बड़ी सफलता से न केवल उनके माता-पिता बल्कि पूरे बाढ़ अनुमंडल में खुशी और गर्व का माहौल है। जैसे ही उनके चयन की खबर गांव पहुंची, लोगों में उत्साह की लहर दौड़ गई।
मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि और कड़ी मेहनत का परिणाम
इस्तित्व आनंद की इस उपलब्धि के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि रही है। उन्होंने अपनी दसवीं की पढ़ाई मसूरी से पूरी की। इसके बाद वे दिल्ली चले गए, जहां से उन्होंने इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की। आगे चलकर उन्होंने दिल्ली के करोड़ीमल कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।
पहले प्रयास में नहीं मिली सफलता, दूसरे प्रयास में हासिल किया 50वां स्थान
इस्तित्व आनंद ने यूपीएससी परीक्षा में लगातार मेहनत और धैर्य का परिचय दिया। अपने पहले प्रयास में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा (PT) पास कर ली थी, लेकिन मुख्य परीक्षा (Mains) में सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और निरंतर प्रयास जारी रखा। इसी मेहनत का परिणाम रहा कि दूसरे प्रयास में उन्होंने पूरे देश में 50वां स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
परिवार का मिला पूरा सहयोग
इस्तित्व आनंद के पिता राजेश कुमार पहले प्राइवेट इंजीनियर थे, लेकिन उन्होंने अपने माता-पिता की सेवा के लिए नौकरी छोड़ दी और घर लौटकर एक कोचिंग संस्थान चलाने लगे। उनकी माता अनमोल कुमारी रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में एएसआई के पद पर तैनात हैं। उनकी दादी रेखा सिन्हा रिटायर्ड शिक्षिका हैं, जबकि उनके दादा आनंदी प्रसाद सिंह पोस्ट मास्टर के पद से सेवानिवृत्त हैं।
गांव में मनाया गया जश्न
इस्तित्व आनंद के आईएएस बनने की खबर जैसे ही उनके गांव ढीवर पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने उनके घर पहुंचकर अबीर-गुलाल लगाकर और मिठाइयां बांटकर इस ऐतिहासिक सफलता का जश्न मनाया।
दादी ने साझा की सफलता की कहानी
इस्तित्व आनंद की दादी रेखा सिन्हा ने बताया कि उनकी बेटी जमशेदपुर में रहती है और उसी ने फोन कर उन्हें पोते के 50वां रैंक हासिल करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस्तित्व आनंद ने यूपीएससी की तैयारी के दौरान किसी भी कोचिंग संस्थान में पढ़ाई नहीं की, बल्कि घर पर रहकर ही तैयारी की।
उन्होंने बताया कि पिछले साल ही इस्तित्व ने बीए की डिग्री हासिल की थी। बीए की परीक्षा देने के दस दिन बाद ही वह पहली बार यूपीएससी की परीक्षा देने गए थे। उस समय उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो सके थे। रेखा सिन्हा ने बताया कि इस्तित्व आनंद उनके गांव के पहले छात्र हैं, जिन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास की है। उनकी मां नौकरी करती हैं और पढ़ाई से जुड़े खर्च का भुगतान वही करती थीं।
बचपन से ही अलग था इस्तित्व का स्वभाव
दादी ने बताया कि बचपन में इकलौता भाई होने के कारण इस्तित्व अक्सर घर की छत पर अकेले बैट-बॉल खेला करते थे। परिवार में इससे पहले कोई भी यूपीएससी सेवा में नहीं रहा है, हालांकि परिवार के कई सदस्य नौकरीपेशा हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस्तित्व आनंद कब गांव आएंगे, इसकी जानकारी अभी उन्हें नहीं है। वहीं बेटे की सफलता की खबर सुनते ही उनकी मां भावुक हो गईं और खुशी के आंसू बहाने लगीं।