छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक अरुणदेव गौतम ने कहा है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए पुलिसिंग में सुधार, ट्रैफिक नियमों के कड़ाई से पालन और नशे के खिलाफ व्यापक सामाजिक भागीदारी बेहद जरूरी है। सरगुजा प्रवास के दौरान पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि सभी रेंज के पुलिस अधीक्षकों और राजपत्रित अधिकारियों की समीक्षा बैठक में अपराध नियंत्रण, थाना स्तर की कार्यप्रणाली और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की पहुंच बढ़ाने जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
डीजीपी ने कहा कि सरगुजा जैसे बड़े और ग्रामीण इलाकों में कई बार पुलिस की निगरानी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाती। ऐसे में पारंपरिक पुलिसिंग तरीकों और व्यावहारिक साधनों को फिर से अपनाने की जरूरत है। उन्होंने डीएसपी स्तर के अधिकारियों को अपने क्षेत्र की गहराई से जानकारी रखने और थाना स्तर पर सतत निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षकों को नियमित निरीक्षण के साथ गांवों का भ्रमण करने और आम लोगों से संवाद बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही, आईजी स्तर पर लगातार समीक्षा कर इन प्रयासों की निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
ट्रैफिक नियमों पर सख्ती जरूरी
ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन, विशेषकर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों पर डीजीपी ने सख्त रुख अपनाने की बात कही। उन्होंने बताया कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत वाहन मालिकों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। सोशल मीडिया पर खतरनाक स्टंट और रील बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि इसे रोकने के लिए समाज को भी आगे आना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को सही दिशा देने में परिवार और स्कूलों की भूमिका भी अहम है।
नक्सलवाद पर नियंत्रण का दावा
नक्सलवाद के मुद्दे पर डीजीपी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब संगठित सशस्त्र नक्सली गतिविधियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं। केवल कुछ छिटपुट तत्व ही बचे हैं, जो छिपकर गतिविधियां चला रहे हैं।
नशे के खिलाफ सामूहिक प्रयास जरूरी
गांजा, अफीम और अन्य मादक पदार्थों की रोकथाम पर उन्होंने कहा कि पुलिस लगातार सप्लाई चेन तोड़ने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि, नशे की मांग को कम करना भी उतना ही जरूरी है।डीजीपी ने चेतावनी दी कि नशे की बढ़ती खपत समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसके लिए परिवार, स्कूल, एनजीओ, स्वास्थ्य संस्थानों और समाज कल्याण विभाग को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही आने वाली पीढ़ी को नशे और अपराध से बचाया जा सकता है।