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छत्तीसगढ़ में लाचार सिस्टम: 90 साल की सास को पीठ पर लादकर 9 किमी पैदल चली बहू, वीडियो वायरल; उठे सवाल
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर Published by: अंबिकापुर ब्यूरो Updated Sat, 23 May 2026 02:45 PM IST
सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड से सरकारी व्यवस्था की पोल खोलती एक भावुक तस्वीर सामने आई है। यहां एक बहू अपनी 90 वर्षीय बुजुर्ग सास को पीठ पर लादकर पेंशन दिलाने के लिए हर महीने करीब 9 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर है। यह घटना मैनपाट ब्लॉक के ग्राम पंचायत कुनिया के जंगलपारा की है।
जंगलपारा में रहने वाली सुखमुनिया बाई अपनी वृद्ध सास को बैंक तक पहुंचाने के लिए पहाड़ी और दुर्गम रास्तों से गुजरती हैं। बुजुर्ग महिला को वृद्धावस्था पेंशन मिलती है। पहले गांव में ही पेंशन राशि उपलब्ध हो जाती थी, जिससे उन्हें कहीं आने-जाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। पिछले कुछ महीनों से बैंक द्वारा फिंगरप्रिंट और भौतिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है।
इसी कारण वृद्धा को स्वयं बैंक पहुंचना पड़ रहा है। बहू सुखमुनिया बाई हर महीने अपनी सास को पीठ पर उठाकर नर्मदापुर स्थित सेंट्रल बैंक तक पहुंचती हैं। उन्हें भीषण गर्मी में पथरीले और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरना पड़ता है। कई स्थानों पर नदी और नालों को पार करना भी उनकी मजबूरी है।
इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद लोगों में व्यवस्था को लेकर नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार डिजिटल इंडिया और घर-घर सुविधाएं पहुंचाने के दावे करती है। वहीं वनांचल क्षेत्रों के बुजुर्ग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं। यह तस्वीर ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अत्यधिक बुजुर्ग, दिव्यांग और असहाय लोगों के लिए पेंशन भुगतान की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। इससे उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। सुखमुनिया बाई की सेवा भावना और समर्पण की लोग सराहना कर रहे हैं। उनकी यह मिसाल कर्तव्य और मानवता को दर्शाती है।
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