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Balod: मां गंगा मैया मंदिर में गूंजे जयकारे, 1300 से अधिक ज्योति कलश प्रज्ज्वलित, दर्शन को पहुंचे भक्त
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: बालोद ब्यूरो Updated Thu, 19 Mar 2026 03:54 PM IST
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शक्ति की उपासना का पावन पर्व चैत्र नवरात्रि आज से हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया है। बालोद जिले के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ मां गंगा मैया मंदिर (झलमला) में सुबह से ही भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर परिसर माता के जयकारों और मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा। नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए, जिसमें दूर-दराज के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था झलक रही है।
घी और तेल की ज्योत से जगमगाया गर्भगृह
इस वर्ष मां गंगा मैया मंदिर में कुल 130 घी ज्योति कलश और 1171 तेल ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए गए हैं। वहीं, परिसर स्थित शीतला माता मंदिर में भी 91 तेल ज्योति कलश और 9 विशेष ज्योत जलाई गई हैं। मंदिर समिति के अनुसार, भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है।
निषाद के जाल से हुआ था माता का प्राकट्य
मां गंगा मैया मंदिर का इतिहास लगभग सवा सौ साल पुराना और चमत्कारिक माना जाता है। जनश्रुतियों के अनुसार, ब्रिटिश काल के दौरान झलमला के एक मछुआरे सोमा निषाद के जाल में जलाशय से यह मूर्ति बार-बार निकल रही थी। माता द्वारा स्वप्न में दर्शन देने के बाद ग्रामीणों ने ससम्मान मूर्ति को बाहर निकाला। चूंकि माता जल (तालाब) से प्रकट हुईं, इसलिए इन्हें 'गंगा मैया' के नाम से पुकारा जाने लगा। तांदुला बांध के निर्माण के समय से ही इस मंदिर की ख्याति और वैभव में निरंतर वृद्धि हुई है।
दर्शन मात्र से मिलती है शांति
नवरात्रि के पहले दिन दर्शन करने पहुंचीं भिलाई की आशा जंघेल (जामुल नगर पंचायत कर्मी) ने बताया कि उन्होंने मंदिर की महिमा के बारे में काफी सुना था और आज यहां आकर वे खुद को सौभाग्यशाली महसूस कर रही हैं। वहीं, अपनी बेटी के जन्मदिन पर दर्शन करने पहुंचीं दीपमाला गेडाम ने कहा कि मंदिर का वातावरण और माता के प्राकट्य की कहानी भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है, यहां आने से मन को असीम सुकून मिलता है।
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