बस्तर संभाग में इन दिनों लकड़ी तस्करी का खेल 'पुष्पा स्टाइल' में खुलेआम जारी है। तस्कर फलदार और हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर ट्रकों के माध्यम से प्रदेश की राजधानी तक सप्लाई कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, जगदलपुर, कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर जैसे जिलों से प्रतिदिन 50 से 100 ट्रक लकड़ी भेजे जा रहे हैं, जो वन विभाग के चेक पोस्टों को पार कर आसानी से निकल जाते हैं।
हालांकि 26 मार्च को कांकेर जिले के चारामा-मचांदूर फॉरेस्ट चेक पोस्ट पर वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने कार्रवाई करते हुए दो ट्रकों को लकड़ी सहित जप्त किया। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक ट्रक दंतेवाड़ा निवासी देवराज गुप्ता का है, जबकि दूसरा ट्रक लोहंडीगुड़ा निवासी अनिल यादव का बताया जा रहा है। दोनों मामलों में अग्रिम कार्रवाई जारी है।
इसके अलावा अमरावती वन परिक्षेत्र के बिंजोली गांव से सूचना मिलने पर एक ट्रक को पकड़ा गया, जिसमें आम जैसे फलदार वृक्षों की अवैध कटाई कर लकड़ी भरी गई थी। जो कि लीलाधर सेठिया का बताया जा रहा है। इस ट्रक को कोंडागांव निस्तार डिपो में जप्त किया गया। वहीं एक अन्य मामले में छूरावंड-सालेमेटा क्षेत्र से आम के पेड़ों की लकड़ी का परिवहन करते ट्रक को करपावंड वन परिक्षेत्र के गारेंगा के पास घेराबंदी कर पकड़ा गया, जिसे डीएफओ जगदलपुर के निर्देश पर डिपो में जप्त किया गया। यह ट्रक भी लीलाधर सेठिया का बताया जा रहा है।
इसके बावजूद स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार तस्कर सरपंच की अनुमति के कागजात तैयार कर बेधड़क लकड़ी परिवहन कर रहे हैं। वन विभाग द्वारा सघन चेकिंग के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकतर कार्रवाई केवल सूचना मिलने पर ही हो रही है। लगातार हो रही अवैध कटाई से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो बस्तर के हरित क्षेत्र पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।