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Haryana State Rural Livelihood Mission; Self Help Group's Bhateri along with other women's lives changed
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हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन; स्वयं सहायता समूह की भतेरी के साथ बदला अन्य महिलाओं का जीवन
कोरोनाकाल में बंद पड़ी कैंटीन संचालन को लेकर जिला प्रशासन से बुलावा आया तो 60 वर्षीय भतेरी ने चूल्हे से कई जिंदगियों में ऐसा उजाला किया कि उनके हाथ को भी रोजगार मिल गया। दरअसल हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह की भतेरी ने रेलवे रोड के बापोड़ा स्टैंड तिकोणा पार्क की कैंटीन संचालन का जिम्मा थामा था।
उसे यहां जरूरतमंदों के लिए सस्ता भोजन मुहैया कराने की जिम्मेदारी मिली। उसने कुछ अन्य महिलाओं को भी अपने साथ लिया और फिर यहां भोजन तैयार करना शुरू किया। रोजाना ही कैंटीन में ब्रेक फास्ट, लंच और डीनर तैयार होता है। इसके साथ-साथ ये महिलाएं खुद अपने हाथों से अचार भी तैयार कर रही हैं, जिसका स्वाद भी लोगों को खूब भा रहा है।
रेलवे रोड वैश्य महाविद्यालय के समीप बापोड़ा स्टैंड चौक पर कैंटीन बनी है। जिसका संचालन फिलहाल जिला प्रशासन द्वारा हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दिया गया है। बवानीखेड़ा के उजाला महिला महासंघ की 60 वर्षीय भतेरी के अलावा कैंटीन संचालन में भागवंती, उषा, सोनिया, बाला भी हाथ बटा रही है। ये महिलाएं रोजाना सुबह सात बजे से 11 बजे तक नाश्ता तैयार करती हैं। इसके बाद दोपहर साढ़े 11 बजे से तीन बजे तक मध्याहन भोजन बनाती हैं और फिर शाम छह से रात नौ बजे तक रात्रि भोजन तैयार करती हैं।
रोजाना ही कैंटीन में करीब 500 से अधिक लोगों के लिए भोजन तैयार होता है। जिसमें दाल, सब्जी, चार रोटी, चावल, सलाद व रायता मिलता है। भतेरी ने बतााय कि उसके पास कोरोनाकाल के दौरान बंद पड़ी कैंटीन संचालन के लिए अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय से एक पत्र आया था। इससे पहले वह स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अचार तैयार करने का काम करती थी। करीब दस साल पहले उसके पति की मौत हो चुकी थी। उसके दो बेटे और एक बेटी है।
सभी बच्चे शादीशुदा हैं। हाथ को रोजगार नहीं था और अन्य महिलाएं भी समूह के साथ जुड़कर थोड़ा बहुत काम करती थी। लेकिन कैंटीन संचालन की जिम्मेदारी आने के बाद समूह की महिलाएं भी यहां खुद के हाथ रोजगार करने के साथ-साथ परिवार का भी भरण पोषण कर रही हैं। भतेरी ने बताया कि उसने सरकारी स्कूल में मिड डे मील का भोजन भी कई सालों तक तैयार किया था, इसलिए भोजन बनाने का अनुभव उसे था।
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