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भिवानी: सरकार की नीयत ठीक नहीं, मनरेगा में बदलाव से 26 करोड़ लोगों का निवाला छीनेगा : राव दान सिंह
मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं थी, बल्कि यह काम के अधिकार पर आधारित एक विचार था। मनरेगा से देश में करोड़ों लोगों को न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित होती थी। मनरेगा पंचायती राज में सीधा राजनीतिक हिस्सेदारी और फाइनेंस सपोर्ट का साधन था। यह बात पूर्व सीपीएस एवं जिला प्रभारी राव दान सिंह ने शनिवार को लोक निर्माण विश्राम गृह में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मनरेगा का नाम बदलने के साथ नियमों में भी बदलाव हुए हैं। केंद्र सरकार का दावा कि अब 100 की जगह 125 दिन रोजगार मिलेगा, लेकिन राव दान सिंह ने कहा कि सरकार की नीयत ठीक नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ये बदलाव 26 करोड़ लोगों का निवाला छीनेगा। इस बदलाव से फायदा कम और नुकसान ज्यादा होगा। पूर्व सीपीएस ने कहा कि मनरेगा एक्ट मजदूरों को हक देता था, वह कोई ऑफिस ऑर्डर से नहीं आया। वह कानून से आया, अब जो नया कानून आया है, वह कोई हक नहीं है। यह केंद्र सरकार कहेगी तो चलेगा, वह नहीं कहेगी तो नहीं चलेगा। पैसा, काम, योजना सब केंद्र सरकार तय करेगी। मनेरगा में 90 प्रतिशत बजट केंद्र सरकार देती थी, अब कह रहे हैं कि बजट में 60 प्रतिशत हिस्सा राशि केंद्र की होगी, बाकी 40 प्रतिशत हिस्सा राशि राज्यों की होगी। यह पैसा भी आवंटित क्षेत्रों, पंचायतों और जिलों को ही देंगे। इस नए कानून से अगर 5 प्रतिशत आवंटित लोगों को रोजगार मिल भी गया तो 95 प्रतिशत बेरोजगार ही रहेंगे। 20 साल में गांवों से पलायन नहीं हुआ, लेकिन अब लोग शहरों की ओर पलायन करेंगे। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने काम का अधिकार दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल शारीरिक श्रम करने वाले किसी भी व्यक्ति को काम दिया जाता था। अब सरकार उन्हीं ग्रामीणों क्षेत्रों में काम उपलब्ध कराएं, जिन्हें केंद्र की ओर अधिसूचित किया जाएगा। नए कानून को 125 दिन की रोजगार की गारंटी वाला बता रहे हैं, लेकिन एक दिन भी गारंटी नहीं, क्योंकि जहां केंद्र सरकार तय करेगी, वहां काम मिलेगा। केंद्र सरकार जितना पैसा राज्यों को अलॉट करेगी, उतना ही काम हो पाएगा।
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