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भिवानी की मनीषा मौत मिस्ट्री: 10 महीने बाद भी नहीं मिला इंसाफ, पिता 29 जून से आमरण अनशन पर
Video Desk Amar Ujala Dot Com Published by: Chandra Prakash Neeraj Updated Thu, 25 Jun 2026 04:56 PM IST
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भिवानी जिले के गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी 19 वर्षीय मनीषा बेहद सामान्य परिवार से थी। वह एक निजी स्कूल में अध्यापिका थी। पिछले साल 11 अगस्त की सुबह वह घर से स्कूल जाने के लिए निकली लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटी। पिता ने थाने में गुहार लगाई पर पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई। 13 अगस्त को सिंघानी के खेतों में मनीषा का क्षत विक्षत शव मिला। उसका चेहरा बुरी तरह से बिगाड़ा गया था। 14 अगस्त को भिवानी जिला नागरिक अस्पताल में धरना देकर परिजनों ने हत्या की आशंका जताई और पुलिस पर समय रहते तलाश ना करने का आरोप लगाया। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ा गया कि परिजनों ने शव लेने से इंकार कर दिया। मनीषा की मौत ने सूबे की राजनीति गरमा दी। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। हालात संभालने के लिए 16 अगस्त को लोहारू थाना के सभी कर्मचारियों को सस्पेंड कर एसपी का तबादला कर दिया गया। लेकिन परिवार ने शव नहीं लिया। 18 अगस्त को पुलिस एक सुसाइड नोट सामने लाई और बताया मनीषा ने आत्महत्या की है। इससे परिजनों का आक्रोश और बढ़ गया। गांव ढाणी लक्ष्मण में करीब सप्ताह भर तक महापंचायत चलती रही। रोहतक पीजीआई के बाद एम्स दिल्ली में तीसरी बार शव का पोस्टमार्टम कराया गया। 20 अगस्त को मुख्यमंत्री ने मामला सीबीआई को सौंपे जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजनों ने मनीषा का 21 अगस्त को अंतिम संस्कार किया। 26 अगस्त को मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। 3 सितंबर को मनीषा मौत मामले की जांच के लिए सीबीआई की छह सदस्यीय टीम पहली बार गांव सिघानी घटनास्थल पर पहुंची। करीब पांच बार सीबीआई दिल्ली से भिवानी आकर मनीषा की मौत से जुड़े सभी तथ्य खंगालने के साथ मौत प्रकरण से जुड़े सभी लोगों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज कर चुकी है। लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। 17 जून को ढाणी लक्ष्मण में पंचायत हुई। इसमें मनीषा के पिता ने 29 जून को उपायुक्त कार्यालय पर आमरण अनशन का फैसला लिया।
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