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The Ratiya Municipal Council had sent a letter warning the councilors that if they imposed a lockdown, such an action would be considered a violation of the rules.
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रतिया नगरपालिका ने पत्र भेज कर पार्षदों को चेताया था कि अगर तालाबंदी की तो उक्त गतिविधि नियमों के विरुद्ध मानी जाएगी
3 दिन में रिकॉर्ड न मिलने पर तालाबंदी की चेतावनी दी पार्षदों ने सोमवार को दी थी तालाबंदी की चेतावनी
रतिया : नगर पालिका में 4 साल का विकास कार्य और टेंडर का रिकॉर्ड मांगने को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रशासन ने चार पार्षदों को पत्र भेजकर सोमवार को प्रस्तावित तालाबंदी नहीं करने की चेतावनी दी है। प्रशासन ने पार्षदों से कार्यालय में तालाबंदी करने की बजाय नगर पालिका अभियंता और लेखाकार से रिकॉर्ड का अवलोकन करने की अपील की थी जिसको लेकर सोमवार को नगर पालिका के पार्षदों विजय कुमार ,कामरेड अजमेर सिंह ,गौरव शर्मा, रमेश गर्ग, विकी ,गुरविंदर सिंह, हैप्पी सिंह, जसवीर सिंह व अन्य नगर पालिका कार्यालय में रिकॉर्ड की जांच करने के लिए पहुंचे तो नगर पालिका में सचिव, म्यूनिसिपल इंजीनियर और कनिष्ठ अभियंता के नही मिलने पर पार्षदों में रोष फैल गया बल्कि लेखाकार मंजीत कौर द्वारा पार्षदों को रिकॉर्ड दिखाने देने की किसी भी प्रकार का निर्देश होने से इनकार कर दिया जिसके बाद पार्षदों ने रोष जताते हुए नगर पालिका सचिव को 3 दिन का समय देते हुए कहा कि अगर 3 दिन में चार साल के विकास कार्य का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाया तो वह नगर पालिका कार्यालय में तालाबंदी कर देंगे। पार्षदों ने आरोप लगाते हुए कहा कि वह पिछले साल से नगर पालिका के 2022 से सभी विकास कार्य और टेंडर का रिकॉर्ड नगर पालिका अधिकारियों से मांग रहे हैं और इसके लिए उन्होंने पिछले साल भी नोटिस दिया था तथा नगर पालिका के गेट पर तालाबंदी की थी जिसमें विधायक जरनैल सिंह ने भी भाग लिया था तालाबंदी के बाद नगर पालिका सचिव ने लिखित में आश्वासन दिया था कि 3 महीने में सारा रिकार्ड उपलब्ध करवा दिया जाएगा लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी अभी तक उन्हें रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगरपालिका के अधिकारी ठेकेदारों की मिली भगत से किए गए घोटाले को छुपाने के लिए रिकार्ड उपलब्ध नहीं करवा रहे अगर यह रिकॉर्ड आम जनता के पास पहुंच जाता है तो नगर पालिका के घोटाले उजागर हो सकते हैं क्योंकि नगर पालिका द्वारा एक ही गली को बार-बार कागजों में बनाकर उनके घोटाले किए गए हैं साथ ही लाखों रुपए के ऐसे फर्जी बिल अदा किए गए हैं जिनमें कोई कार्य ही नहीं कराए गए हैं जिसको लेकर विजिलेंस द्वारा अलग से जांच भी की जा रही है उन्होंने बताया कि आज नगर पालिका सचिव ने उन्हें नोटिस देकर रिकॉर्ड अवलोकन करने के लिए बुलाया था लेकिन जब वह नगर पालिका कार्यालय में पहुंचे तो नगर पालिका का कोई भी अधिकारी उपलब्ध नहीं था इसलिए नगर पालिका अधिकारियों को तीन दिन का नोटिस दिया जाता है कि वह तीन दिन में रिकॉर्ड उपलब्ध करवा दे नहीं तो तीन दिन बाद शुक्रवार को नगर पालिका कार्यालय पर तालाबंदी की जाएगी। पार्षद विजय कुमार में पार्षद कामरेड अजमेर सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि नगर पालिका के अधिकारी जानबूझकर जनता को गुमराह कर रहे हैं उन्होंने कहा कि नगर पालिका अधिकारियों को पूरा रिकॉर्ड आम जनता के सामने रखना चाहिए
ज्ञात रहे कि गौरतलब है कि 21 जुलाई को चारों पार्षदों ने नगरपालिका
अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर वर्ष 2022 से अब तक हुए विकास कार्यों की जानकारी मांगी थी। इसमें जारी किए गए सभी टेंडरों, पूरे हो चुके कार्यों, लंबित कार्यों, प्रत्येक कार्य पर खर्च राशि, कार्यों के नाम और वर्तमान स्थिति का विवरण मांगा गया था व रिकॉर्ड न देने पर 27 जुलाई को नगरपालिका में तालाबंदी की चेतावनी विधि थी जिसके बाद नगर पालिका सचिव द्वारा चारों पार्षदों को पत्र भेज कर
27 जुलाई को प्रस्तावित तालाबंदी नहीं करने की चेतावनी दी थी । प्रशासन ने पार्षदों से कार्यालय में तालाबंदी करने की बजाय नगर पालिका अभियंता और लेखाकार से रिकॉर्ड का अवलोकन करने की अपील की थी व पत्र में स्पष्ट किया गया था कि सरकारी कार्य में बाधा डालना या तालाबंदी जैसी गतिविधियां नियमों के विरुद्ध हैं।
नगर पालिका प्रशासन ने यह भी कहा है कि यदि किसी दस्तावेज या रिकॉर्ड के संबंध में कोई शंका है तो उसका समाधान नियमानुसार कार्यालय स्तर पर कराया जा सकता है। इससे अनावश्यक विवाद की
स्थिति भी नहीं बनेगी। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्यालय का नियमित कामकाज प्रभावित होने से आम नागरिकों को भी अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ सकती है नगर पालिका सचिव द्वारा चारों पार्षदों को पत्र जारी करने के बाद पार्षदों ने सोमवार को तालाबंदी की चेतावनी दी थी लेकिन सोमवार को एकजुट पार्षदों ने 3 दिन और रिकॉर्ड देने का समय नगर पालिका को देकर कहा कि अगर तीन दिनों तक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाया तो उसके बाद तालाबंदी करने को मजबूर होंगे।
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