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Dispute over health check-ups at the Hansi-Chanaut protest site at 2 AM; administration and villagers make conflicting claims.
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हांसी के चानौत धरना पर रात 2 बजे स्वास्थ्य जांच को लेकर विवाद, प्रशासन और ग्रामीणों के दावे अलग-अलग
गांव चानौत में पेयजल की मांग को लेकर चल रहे धरने के बीच बुधवार रात करीब दो बजे पुलिस प्रशासन ने आमरण अनशन पर बैठे लोगों को उठाने का प्रयास किया था। मामले में अब डीएसपी रविंद्र सांगवान व एसडीएम राजेश खोथ की सफाई आई हैं।
उन्होंने बताया कि तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलने पर प्रशासन रात करीब 2 बजे स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ धरनास्थल पर पहुंचा थ। धरने पर अनशनकारी नहीं मिले व लोगों ने हूटिंग कर दी। जिसके बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। इस दौरान मौके पर तनावपूर्ण माहौल भी बना।
वहीं मौके पर पहुंचे डीएसपी रवींद्र सांगवान ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे एसडीएम के निर्देश पर केवल सेवा भाव से बुजुर्ग अनशनकारियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों द्वारा हूटिंग किए जाने के बाद भी प्रशासन ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बनने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम वापस लौट गई। डीएसपी रवींद्र सांगवान ने अपनी नेम प्लेट गिरने के सवाल पर कहा कि ग्रामीणों से बातचीत के दौरान उनकी नेम प्लेट गिर गई थी।
उधर हांसी के एसडीएम राजेश खोथ ने कहा कि मानवाधिकारों के अनुसार प्रशासन का पहला कर्तव्य लोगों के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करना है। उन्होंने बताया कि 82 वर्षीय टेकचंद, जो अस्थमा के मरीज हैं, सहित अन्य अनशनकारियों की तबीयत खराब होने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी गई थी। लेकिन अनशनकारियों के सहयोग नहीं करने पर टीम को वापस लौटना पड़ा।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच ग्रामीणों द्वारा जारी एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में कुछ चानौत ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने कोई गलत कार्रवाई नहीं की। वहीं पुलिस का दावा है कि जब टीम धरनास्थल पर पहुंची तो उस समय कुछ अनशनकारी वहां मौजूद नहीं मिले।
अब इस मामले में प्रशासन और धरना दे रहे ग्रामीणों के दावे अलग-अलग हैं, जबकि पानी की मांग को लेकर चानौत का आंदोलन लगातार जारी है।
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