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हांसी में बेसहारा पशुओं का आतंक, लाखों खर्च के बावजूद नहीं बदले हालात
संवाद न्यूज एजेंसी
हांसी। हांसी को आधुनिक जिला बनाने की दिशा में कई योजनाएं लागू की जा रही हैं, लेकिन शहर की सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु आज भी आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बने हुए हैं। नगर परिषद की ओर से समय-समय पर बेसहारा पशुओं को पकड़कर नंदीशालाओं और गौशालाओं में भेजने के लिए लाखों रुपये के टेंडर जारी किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा।
शहर के मुख्य बाजारों, कॉलोनियों और प्रमुख मार्गों पर बड़ी संख्या में बेसहारा पशु खुलेआम घूमते नजर आते हैं। कई जगह ये पशु सड़क के बीचों-बीच बैठे रहते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पशुओं की वजह से पहले भी कई गंभीर सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें लोगों की जान तक गई है और अनेक लोग घायल हुए हैं। लोगों का आरोप है कि कुछ पशुपालक दूध निकालने के बाद अपने पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं। सुबह और शाम दूध निकालने के समय उन्हें वापस ले जाया जाता है और बाद में फिर सड़कों पर छोड़ दिया जाता है, जिससे समस्या लगातार बनी रहती है।
रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। कम रोशनी के कारण सड़क पर बैठे पशु वाहन चालकों को समय पर दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। सबसे अधिक खतरा दोपहिया वाहन चालकों को रहता है।
स्थानीय निवासी अमित कुमार का कहना है कि यदि नगर परिषद बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है, तो उसका असर भी जमीन पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि बेसहारा पशुओं को स्थायी रूप से गौशालाओं और नंदीशालाओं में भेजा जाए तथा अपने पशुओं को सड़कों पर छोड़ने वाले पशुपालकों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए।
वहीं, हांसी के जिला उपायुक्त राहुल नरवाल ने कहा कि बेसहारा एवं आवारा पशुओं के लिए जल्द ही पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हांसी प्रशासन इस दिशा में कार्य कर रहा है और समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि आधुनिक जिले की पहचान रखने वाला हांसी शहर आखिर बेसहारा पशुओं से कब मुक्त होगा। शहरवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द प्रभावी कार्रवाई कर इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान करेगा
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