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Preparations to increase cotton acreage which has been continuously decreasing for the last six years
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हिसार: छह साल से लगातार कम हो रहे कपास के रकबे को बढ़ाने की तैयारी
प्रदेश में पिछले छह साल से कपास का रकबा लगातार कम हो रहा है। कपास का क्षेत्र 8 लाख हेक्टेयर से कम होकर 3.9 लाख हेक्टेयर तक सिमट जाने पर कृषि विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। प्रदेश के कृषि विभाग ने प्रमोशन फॉर कॉटन कल्टीवेशन इन हरियाणा विंग का गठन किया। यह विंग प्रदेश भर में कपास का दायरा बढ़ाने के लिए काम करेगी। खासतौर पर प्रदेश के सबसे अधिक कपास वाले 7 जिलों में फोकस करेगी। इन जिलों में सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी-दादरी, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ शामिल हैं।
पीसीसीएच की ओर से प्रदेश भर में कपास के प्रदर्शनी प्लांट लगाए जाएंगे। हर एक जिले में दो एकड़ में यह प्रदर्शनी प्लांट लगेंगे। जिनमें कृषि विभाग व चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की निगरानी में कपास की खेती की जाएगी। विभाग के अधिकारी खेत की तैयारी के समय से ही इसका रिकॉर्ड मेनटेन करेंगे। जिसमें खेत में डाली जाने वाली, खेत की जुताई, बिजाई, पहला पानी लगाना, निराई -गुड़ाई के हर एक स्तर पर फोटो लिए जाएंगे। इसकी वीडियो ग्राफी की जाएगी। कपास में किस समय कौन सा खाद , कौन सी दवा का कितना छिड़काव करना है इसके बारे में वैज्ञानिक ही बताएंगे। कपास में कौन सा कीट हानिकारक स्तर पर पहुंच गया है इस बारे में आर्थिक गणना करना सिखाया जाएगा। किसान को कीटों की पहचान करना सिखाया जाएगा। कपास की चुगाई तक की पूरी प्रक्रिया विभाग के अधिकारियों की निगरानी में होगी। जिले में लगाए गए इन प्रदर्शनी प्लांट को देखने के लिए कपास किसान आ सकेंगे। खेत का मालिक उन किसानों को पूरी जानकारी देगा। कपास की चुगाई के बाद उसके उत्पादन के आधार पर पूरा रिजल्ट स्कोर बोर्ड के साथ तैयार किया जाएगा। जिसमें बताया जाएगा कि बिजाई में कितना बीज उपयोग किया गया, किस तरह से खेत तैयार किया, कब व कितने पानी लगाए गए, कितना कीटनाशक स्प्रे किया, कौन सी बीमारी आई, बीमारी को किस तरह से नियंत्रित किया गया, कितना उत्पादन हुआ।
आखिर में यह बताया कि जाएगा कि एक एकड़ में वैज्ञानिकों की निगरानी में की गई इस कपास की खेती से से कितना मुनाफा हुआ।
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