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Two-day agricultural officer workshop concludes at Hisar HAU; one variety each of paddy, peanut, and sorghum, and three varieties of cotton approved
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हिसार एचएयू में दो दिवसीय कृषि अधिकारी कार्यशाला का समापन; धान, मूंगफली,ज्वार की एक-एक किस्म तथा कपास की तीन किस्में अनुमोदित
एचएयू में आयोजित दो दिवसीय कृषि अधिकारी कार्यशाला (खरीफ) 2026 में धान, मूंगफली,ज्वार की एक-एक किस्म तथा कपास की तीन किस्मों को अनुमोदित किया है। प्रदेश में मूंग का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाएगा। किसान ग्रीष्मकालीन मूंग की बिजाई मार्च के दूसरे पखवाड़े से अप्रैल के प्रथम पखवाड़े तक कर सकते है। दक्षिण-पश्चिम हरियाणा क्षेत्र में मूंग की फसल की अच्छी पैदावार के लिए 2 किलो पोटेशियम नाइट्रेट (13-0-45) का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर दो छिडक़ाव फूल निकलने और फलियां बनते समय किए जाने चाहिए।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौलिक विज्ञान एवं मानवीकि महाविद्यालय के सभागार में विस्तार शिक्षा निदेशालय की ओर से आयोजित कार्यशाला के समापन मौके पर बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज कार्यशाला में तय सिफारिशों को किसानों तक पहुंचाएं। जिससे अगामी खरीफ सीजन मे उनका लाभ मिल सकें। उन्नत कृषि तकनीकों,नवीनतम अनुसंधान उपलब्धियों, उन्नत किस्मों के बीजों, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा फसल विविधीकरण को प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचाने में सहयोग दें।
फसल उत्पादन, उन्नत बीज प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, कीट रोग नियंत्रण, जल संरक्षण तकनीक, कृषि में मशीनीकरण तथा जलवायु परिवर्तन के परिपेक्ष में कृषि प्रबंधन में तकनीकों काे अपनाएं।कार्यशाला के दौरान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने शोध अनुभव सांझा किए। कृषि विभाग के अधिकारियों ने फील्ड स्तर की समस्याओं और चुनौतियों से अवगत करवाया।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ रामप्रताप सिहाग ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार ने किसानों के जोखिमों को कम करने के लिए योजनाएं चलाई हैं। उन्होंने किसान प्रशिक्षण, कृषि मेला और फील्ड डेमो आयोजित करने का सुझाव दिया। विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रमेश कुमार यादव ने बताया कि कार्यशाला में विभिन्न छ: सत्र आयोजित किए गए। जिनमें धान, मक्का, दलहनी फसलें, तिलहन, वानिकी, शुष्क खेती एवं चारा फसलों को लेकर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई ।
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कार्यशाला में 8 सिफारिशें स्वीकृत हुई
1. एचकेआर.49: यह एक धान की एक अर्ध बोन्नी, जल्दी पकने वाली और ज़्यादा पैदावार देने वाली किस्म को अनुमोदित किया। 120 दिन में पकने वाली इस किस्म में दाने लम्बे पतले (सुपरफाइन) होते हैं। सीधी बुवाई डीएसआर की स्थिति में अच्छी पैदावार देती है। जिसकी औसत पैदावार 32 क्विंटल/एकड़ ,बेस्ट उत्पादन क्षमता 38 क्विंटल/एकड़ है।
2. मूंगफली की जीएनएच 804 किस्म को राज्य के सिंचित क्षेत्र में समय पर बिजाई के लिए अनुमोदित किया। यह एक सीधी और गुच्छेदार किस्म है। जिसकी औसत उपज 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ है। इसमे तेल की मात्रा 52 प्रतिशत होती है। यह किस्म 120 से 130 दिन में पक कर तैयार हो जाती है।
3. सीएसवी 64एफ: चारा ज्वार की इस किस्म को उत्तर भारत के सभी चारा उत्पादक क्षेत्रों के लिए अनुमोदित किया गया है। यह एक कटाई के लिए उपयुक्त मिठास देने वाली किस्म है। इस किस्म की हरे चारे की पैदावार 185-190 क्विंटल/एकड है।
4. आरसीएच 846 बीजी2: बी.टी. कपास की संकर किस्म हरियाणा में समय पर बिजाई के लिए अनुमोदित की गई है। इस किस्म की अवधि 150-160 दिन है। इस किस्म की औसत पैदावार 14.75 क्विंटल प्रति एकड़ है।
5. आरसीएच 951 बीजी2: बी. टी. कपास की संकर किस्म हरियाणा में समय पर बिजाई के लिए अनुमोदित की गई है। इस किस्म की अवधि 160-170 दिन है। इस किस्म की औसत पैदावार 15.7 क्विंटल प्रति एकड़ है।
6. रघुवीर बीजी2: बी.टी. कपास की संकर किस्म हरियाणा में समय पर बिजाई के लिए अनुमोदित की गई है। इस किस्म की अवधि 150-160 दिन है। इस किस्म की औसत पैदावार 14.13 क्विंटल प्रति एकड़ है।
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