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Director Dr. M.L. Jat visited the Central Soil Salinity Research Institute, Karnal, on Harvest Day
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फसल कटाई दिवस पर निदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल का किया दौरा
फसल कटाई दिवस के अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल का दौरा किया। यह कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत के लिए उन्नत कृषि पद्धतियां विषय के अंतर्गत आयोजित किया गया जिसमें टिकाऊ, सक्षम एवं कुशल कृषि प्रणाली की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, किसानों एवं अन्य संबंधित पक्षों को संबोधित करते हुए डॉ. जाट ने कहा कि नवाचार संसाधनों के समुचित उपयोग तथा पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से भारतीय कृषि में व्यापक परिवर्तन संभव है। उन्होंने आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य, अनियमित वर्षा और बढ़ते तापमान जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए जलवायु के अनुकूल फसल किस्मों और कृषि पद्धतियों का विकास अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. जाट ने जल, उर्वरक एवं ऊर्जा जैसे संसाधनों के न्यूनतम उपयोग के साथ अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि संसाधनों का कुशल प्रबंधन ही सतत कृषि की आधारशिला है।
मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य के पारस्परिक संबंध को रेखांकित करते हुए उन्होंने सुरक्षित एवं पौष्टिक खाद्य प्रणाली के लिए समन्वित दृष्टिकोण मृदा स्वास्थ्य का महत्व।
उन्होंने कृषि उत्पादकता में मृदा की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए विशेषकर लवणीय प्रभावित क्षेत्रों में मृदा उर्वरता बढ़ाने तथा भूमि क्षरण को रोकने वाली तकनीकों को अपनाने पर बल दिया।
डॉ. जाट ने प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा एवं कृषि जनित प्रदूषण को कम करने पर जोर देते हुए दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की बात कही।
दौरे के दौरान उन्होंने संस्थान में चल रहे अनुसंधान कार्यों की समीक्षा की तथा मृदा लवणता प्रबंधन और सतत भूमि उपयोग से संबंधित परियोजनाओं की सराहना की। उन्होंने बंजर एवं क्षतिग्रस्त भूमि के सुधार तथा किसानों की आय में वृद्धि हेतु विकसित नवीन तकनीकों को उपयोगी बताया।
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