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नेपाल से 40 अधिकारियों का दल प्राकृतिक खेती करने की बारीकियां जानने पहुंचा कुरुक्षेत्र
भारत के पड़ौसी देश नेपाल में अब जैविक नहीं बल्कि प्राकृतिक खेती की जाएगी। इसके लिए गुरुकुल कुरुक्षेत्र के सरंक्षक एवं गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का प्राकृतिक खेती मॉडल अपनाया जाएगा। भारत सरकार की पहल पर न केवल वहां की सरकार ने सहमति जताई है बल्कि इसके लिए कृषि से लेकर वानिकी व पशुपालन विभाग तक को निर्देशित किया है।
इसी के चलते ही नेपाल के केंद्रीय व विभिन्न प्रदेशों के उक्त विभागीय अधिकारियों का दल गुरुकुल कुरुक्षेत्र पहुंचा है, जहां इन अधिकारियों ने गुरुकुल फार्म पर प्राकृतिक खेती को करीब से देखा तो तीन दिन इसे करने के लिए हर विधि को बारीकी से जाना है। प्राकृतिक खेती व इसे करने की विधियों को जान ये अधिकारी हैरान रह गए। अब न केवल वहां सरकार के समक्ष यह मॉडल पेश किया जाएगा बल्कि किसानों को भी इसके लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पद्मश्री अवार्डी एवं प्राकृतिक खेती के राज्य कोर्डिनेटर डॉ हरिओम, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ बलजीत सिंह सहारण सहित अन्य विशेषज्ञों ने इन अधिकारियों को प्राकृतिक खेती की बारीकियों से अवगत कराया।
नेपाल में फिलहाल जैविक खेती ही : उमेश
कृषि अधिकारी उमेश कुमार महतो ने बातचीत में बताया कि नेपाल में फिलहाल जैविक खेती ही व्यापक स्तर पर की जाती है लेकिन यहां आने पर पता चला कि इसका भी बेहतर विकल्प प्राकृतिक खेती है। यह न केवल जीरो बजट खेती है बल्कि इसे अपनाकर हम खाद, दवाईयां व कैमिकल मुक्त भोजन भी हासिल कर सकेंगे। बीमारियां कम होंगी तो नागरिक देश के विकास में अधिक योगदान दे सकेंगे। एक देसी गाय से 30 एकड़ तक खेती की जा सकती है। इसमें गाय के गोबर से तैयार जीवाणुओं का कल्चर ही फसल में डाला जाता है। फसल के लिए कुछ भी बाजार से खरीद की जरूरत नहीं। यह सभी अधिकारियों ने बारीकी से समझा है। अब सरकार के समक्ष भी यह विस्तृत रिपोर्ट रखी जाएगी।
जीडीपी में 22 फीसदी कृषि का योगदान : विवेक महतो
कृषि विस्तार अधिकारी विवेक नंद महतो का कहना है कि नेपाल की जीडीपी में कृषि का 22 फीसदी योगदान है। अभी जैविक खेती ही अनेक वर्षों से बड़े स्तर पर की जाती है, जिसके लिए वहां बाजार भी है लेकिन प्राकृतिक खेती को अपनाकर न केवल हम स्वस्थ रहेंगे बल्कि गाय को भी सरंक्षण मिल पाएगा। नेपाल में किसी भी प्रकार का खाद निर्माण नहीं होता और यह आयात ही किया जाता है। प्राकृतिक खेती अपनाकर इस बड़ी समस्या व खर्च से भी छुटकारा मिल सकता है। ऐसे में वहां जाने पर सरकार के समक्ष मार्केट तैयार किए जाने व किसानों में व्यापक संदेश देने का आह्वान किया जाएगा। वे बताते हैं कि गुरुकुल फार्म पर धान, फल व सब्जियों की खेती देखी है जो नेपाल में की जाने वाली खेती से भी बेहतर मिली है। इस जरूरत है कि इस खेती को तैयार करने विधि का सही प्रयोग करने की। यह खेती अपनाकर किसानों का खेती पर खर्च शून्य हो जाएगा और वे समृद्व होंगे।
केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती के प्रति गंभीर : डॉ हरिओम
पद्मश्री डॉ हरिओम का कहना है कि प्रदेश के साथ ही केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती के प्रति गंभीर है। बजट में प्राकृतिक खेती के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। गत 22 फरवरी को ही केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी यहां प्राकृतिक खेती मॉडल देखने पहुंचे थे। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद्र व विभिन्न प्रदेशों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री व विशेषज्ञ भी फार्म का अवलोकन कर चुके हैं। यहां प्रशिक्षण केद्र में प्राकृतिक खेती करने की हर बारीकी से रूबरू कराया जा रहा है।
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