सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में आयोजित भव्य कांवड़ यात्रा इस बार श्रद्धा की जगह आंसुओं में डूब गई। तीन दिनों में सात श्रद्धालुओं की मौत ने न सिर्फ इलाके को हिला दिया, बल्कि सोशल मीडिया से लेकर सरकार तक को झकझोर कर रख दिया। मंगलवार से गुरुवार तक लगातार हुई मौतों ने इस धार्मिक आयोजन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंगलवार: रुद्राक्ष वितरण में भगदड़, दो महिलाओं की मौत
मंगलवार को रुद्राक्ष वितरण के दौरान कुबेरेश्वर धाम में भगदड़ मच गई। इस अफरातफरी में दो महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान जसवंती बेन (56 वर्ष), निवासी राजकोट (गुजरात), और संगीता गुप्ता (48 वर्ष), निवासी फिरोजाबाद (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। यह घटना भीड़ और कुप्रबंधन की ओर इशारा करती है, जिससे लाखों श्रद्धालु हर वर्ष जूझते हैं।
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बुधवार: कांवड़ यात्रा के दौरान तीन श्रद्धालुओं की मौत
बुधवार को तीन श्रद्धालुओं की जान चली गई। चतुर सिंह (50), गुजरात निवासी, आनंद होटल के पास अचानक गिर पड़े और मौके पर ही दम तोड़ दिया। ईश्वर सिंह (65), हरियाणा निवासी, कुबेरेश्वर धाम परिसर में बेहोश होकर गिर पड़े। दिलीप सिंह (57), छत्तीसगढ़ निवासी, को शाम के समय जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हार्ट अटैक से उनकी मृत्यु हो गई।
गुरुवार: दो और मौतें, दिल दहलाने वाली स्थिति
गुरुवार को दो अन्य श्रद्धालुओं की भी मृत्यु हो गई। उपेंद्र गुप्ता (22), निवासी गोरखपुर, को जिला अस्पताल में मृत घोषित किया गया। अनिल (40), दिल्ली निवासी, को भी हार्ट अटैक आया और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनका निधन हो गया।
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मिश्रा ने जताया दुख
कई श्रद्धालु भी गर्मी और भीड़ की वजह से घायल या बेहोश हो गए। सुनीता (हरियाणा निवासी) हाईवे पर गिरकर घायल हो गईं। पूजा सैनी (मथुरा निवासी) कुबेरेश्वर धाम में गिर गईं। मनीषा (नागपुर निवासी) अचानक बेहोश हो गईं। कुबरेश्वर धाम के प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं की मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "वे मेरी बहनें थीं, जीजी थीं, मेरा परिवार थीं। मुझे अत्यंत दुख है। समिति हमेशा उनके परिवारों के साथ खड़ी है। यह धाम सभी का मायका है।"
क्या 5 लाख श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त तैयारी थी?
पंडित मिश्रा के नेतृत्व में बुधवार को सीवन नदी से कुबेरेश्वर धाम तक 11 किमी लंबी कांवड़ यात्रा निकाली गई, जिसमें 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने का दावा किया गया। लेकिन इतनी बड़ी संख्या के लिए क्या प्रशासन और आयोजन समिति ने उचित व्यवस्थाएं की थीं?
भीषण गर्मी, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, भीड़ नियंत्रण की असफलता और ट्रैफिक अव्यवस्था को इन मौतों का मुख्य कारण माना जा रहा है।
श्रद्धालुओं में डर और आक्रोश
इन घटनाओं के बाद श्रद्धालुओं में भय और आक्रोश व्याप्त है। सोशल मीडिया पर अनेक वीडियो और पोस्ट के माध्यम से अव्यवस्थाओं को उजागर किया गया है। मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है।
जांच समिति गठित
एसपी दीपक कुमार शुक्ला ने जानकारी दी कि गुरुवार को आठ डीजे पर कार्रवाई की जा चुकी है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में एक जांच दल गठित किया जा रहा है, जो सभी पहलुओं की जांच करेगा। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।