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महेंद्रगढ़: गांव उष्मापुर की पहाड़ियों में खनन से 105 घरों में आई दरारें, ग्रामीणों ने उपमंडल अधिकारी को सौंपी सूची
गांव उष्मापुर के ग्रामीणों ने शनिवार को उपमंडल अधिकारी से मिलकर खनन के दौरान की जा रही ब्लास्टिंग से घरों में आई दरारों से हुए नुकसान को लेकर 105 लोगों की सूची सौंपी। इस दौरान ग्रामीणों की ओर से लघु सचिवालय में नारेबाजी कर रोष व्यक्त किया गया। लघु सचिवालय प्रांगण में ही बैठक कर ग्रामीणों ने खनन को बंद करने की मांग भी उठाई। साथ ही खनन से हो रही परेशानियों से अवगत कराया। ग्रामीणों की ओर से उपमंडल अधिकारी कनिका गोयल से मुलाकात कर बताया कि खनन के दौरान हो रहे धमाकों से गांव के 80 प्रतिशत मकानों में दरारें आ गई हैं। उपमंडल अधिकारी ने ग्रामीणों से जांच करा हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
बलवान फौजी की अध्यक्षता में करीब 150 ग्रामीण महिला-पुरुष लघु सचिवालय पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि गत 28 दिसंबर को हुई ग्रामीणों की बैठक के दौरान सर्व सम्मति से जिन घरों में ब्लास्टिंग के कारण नुकसान हुआ है या दरारें आई हैं उनकी सूची बनाने की सहमति बनी थी। इसके बाद ग्रामीणों ने अपने स्तर पर प्रयास कर 105 लोगों की सूची तैयार की है जिनके घरों में दरारे हैं। जब तक ब्लास्टिंग होती रहेगी तब तक घरों में नुकसान होता रहेगा। बलवान फौजी ने उपमंडल अधिकारी के समक्ष ग्रामीणों का पक्ष रखा गया।
करण सिंह, चंद्र मास्टर, लक्ष्मण, अनिल कुमार, कर्ण सिंह, किशनलाल, शिवलाल, किशोर, धर्मबीर, अमित, ललित, राजबाला, लाली देवी, कैलाश देवी, कुसुम, भागपति, पवित्रा, निर्मला, सुरस्ती, गुड्डी, रामकला सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव में चार से पांच क्रशर लगे है उन्होंने गांव की कृषि भूमि की 20 जमीन लीज पर ले ली थी। अब उनके आसपास गांव की बची हुई कृषि भूमि में से भी करीब 30 प्रतिशत उन क्रशर की वजय से खराब हो गई है। गांव में पहाड़ की ओर जो कृषि भूमि है वो 20 प्रतिशत है जो पहले ही बंजर हो चुकी है क्योंकि वहां पानी नहीं है। अब जो 30 प्रतिशत कृषि भूमि बची है उसमें गांव में खाने के लिए अनाज ओर पशुओं का चारा भी पर्याप्त नहीं हो पाता है। लोग के लोग भेड़, बकरी, गाय, भैंस, ऊंटाें को पहाड़ ओर जंगल में चराने ले जाते थे जिससे उनकी जीविका चलती थी। लेकिन खनन के कारण हुई चारे की कमी के चलते अनेक ग्रामीणों ने अपने पशु तक बेच दिए हैं। जहां से इन पशुओं को प्राकृतिक रूप से चारा मिलता था। आज बड़े पैमाने पर विस्फोट और खनन और वहां उनकी प्राइवेट सुरक्षा कंपनी इन लोगों को वहां से खदेड़ देती थी। इन सब के बदले संपूर्ण गांव को क्या मिला धूल, बीमारी, घरों में नुकसान, खेती में नुकसान, पशुओं में नुकसान, ध्वनि प्रदूषण, प्राकृतिक संपदा का पूरा नुकसान, धमकियां, डर, प्रशासन की लापरवाई।
वहीं, उपमंडल अधिकारी कनिका गोयल ने बताया कि इस समस्या के लिए जल्द ही एक इंजीनियर्स की टीम गठित की जाएगी। यह टीम गांव में सर्वे करेगी। उन्होंने ग्रामीणों को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
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