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My Village, My Pride: The Baba Jairamdas Dham in the village of Pali stands as a nationwide center of faith, where villagers recount tales of miracles rooted in local legends
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मेरा गांव मेरी शान: देशभर में आस्था का केंद्र है गांव पाली का बाबा जयरामदास धाम, दंतकथाओं में ग्रामीण सुना रहे चमत्कार
गांव पाली स्थित परमहंस बाबा जयरामदास मंदिर केवल गांव के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश में भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में दक्षिण और पूर्वी भारत के लोग भी दर्शन करने आते हैं और कामना पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाते हैं। बाबा के धाम में भक्तों की श्रद्धा एवं आस्था के चलते एक झोंपड़ी से भव्य मंदिर का भी सफर तय किया है।
ग्रामीण बताते हैं कि सन 1862 को बाबा जयरामदास महाराज का जन्म हुआ था। गांव पाली में उनका परिवार रहता था। बाबा जब सात साल की आयु के थे तो अकाल पड़ा था और जोट का एक बैल मर गया था। इसके बाद बाबा स्वयं बैल के साथ लगकर खेत की जुताई व बीजाई की। जब फसल हुई तो अनाज एकत्र कर रहे थे। तभी उनके पिता ने बाबा को अनाज की रखवाली के लिए बैठाया, लेकिन बाबा मनमौजी थे और ईश्वर में ध्यान लगा लेते तो आसपास को भूल जाते। उसी दौरान एक गाय आई और फसल को खा गई। तभी उनके पिता ने बाबा की पिटाई की तो वे अपने मामा के घर चरखी दादरी जिला के गांव रणकोली में चांदूदास चले गए। यहां पर उनको ज्ञान की प्राप्ति हुई।
इसके बाद वे पाली में आकर जाल के पेड़ के नीचे रहने लगे और कुटिया में अपना जीवन गुजारा। इस दौरान उन्होंने काफी चमत्कार किए और लोगों को कष्टों से मुक्ति दिलाई। बाद में लोगों को फायदा मिला तो उन्होंने बाबा को माना और उनकी पूजा करनी शुरू कर दी। सन 1942 को बाबा ने समाधि ली और इसके बाद हर साल माघ की एकादशी को मेला लगाया जाता है। मेला अवसर पर और विभिन्न प्रकार की खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। वहीं क्रिकेट प्रतियोगिता में राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हर साल बाबा जयरामदास क्रिकेट स्टेडियम में खेल का प्रदर्शन करते हैं। वहीं खेलों देश के विभिन्न हिस्सों से खिलाड़ी पहुंचते हैं। अब 2022 में बाबा के मंदिर का साढ़े 6 करोड़ रुपये से नया भवन बनाया गया है। इसमें धोलपुर के सफेद पत्थर पर नक्कासी आकर्षण का केंद्र है।
ग्रामीण बोले: हमारी गहरी आस्था, बाबा करते हैं चमत्कार:
बाबा हर भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं और लाखाें लोग यहां पर कामना पूरी होने पर दान करके गए हैं। इसी से ही तीन धर्मशाला और बाबा का भव्य भवन बन पाया है। हर रोज पक्षियों को 35 किलो अनाज डाला जाता है। फिलहाल 6.50 करोड़ रुपये से नया भवन बनाया गया है और भक्तों के लिए टीन शेड लगाया जाएगा। वर्षभर मंदिर में विकास कार्य होते रहते हैं। - भंवर सिंह, प्रधान, मंदिर कमेटी।
बाबा के पास एक कुतिया रहती थी और बच्चों को जन्म देने के बाद उसकी मौत हो गई थी। तभी बाबा ने उसको लात मारी और उठने के लिए कहा तो वह जीवित हो गई। ऐसा हमारे पूर्वज बताते थे और अब भी युवा नौकरी की कामना करके जाते हैं और सफल हो रहे हैं। -कंवर सिंह, ग्रामीण।
कमेटी की ओर से बाबा पर आने वाले चढ़ावे से युवाओं के लिए वॉलीबाल, कबड्डी, कुश्ती, क्रिकेट, एथलेटिक्स का मैदान तैयार किया गया है। यहां पर खिलाड़ी तैयारी करते हैं और सेना में भर्ती हो जाते हैं। भक्तों के रुकने के लिए धर्मशाला बनाई गई हैं। माघ की एकादशी पर लगने वाले विशाल मेले में लाखों की भीड़ उमड़ती है। - प्रदीप कुमार, सचिव, मंदिर कमेटी।
मंदिर में 200 साल से अधिक पुराना पीपल का पेड़ है। इसमें लोगों की आस्था है और लोग पूजा करते हैं। बाबा लोगों को आशीर्वाद के तौर पर गाली देते और लात मार देते थे। लोग आशीर्वाद समझकर खुश होते और उनके काम भी बन जाते थे। बाबा के धाम में आस्था से वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। - उत्तम सिंह, ग्रामीण।
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