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Bilaspur: रेल लाइन के बाहर धरना दे रहे लोगों और प्रशासन के बीच वार्ता हुई विफल
भानुपल्ली-बैरी रेल लाइन की निर्मार्णाधीन टनल नंबर-17 के बाहर धरना दे रहे लोगों और प्रशासन के बीच वीरवार को बैठक हुई, लेकिन उसमें कोई सहमति नहीं बन पाई। प्रशासन ने टनल का निर्माण शुरू करने के निर्देश दिए। इन निर्देशों पर कंपनी ने वीरवार शाम को काम भी शुरू करने की कोशिश भी की, लेकिन लोगों ने उसे रूकवा दिया। बैठक उपायुक्त कार्यालय में हुई। इसकी अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त ओमकांत ठाकुर ने की। बैठक में धरना दे रहे लोगों के अलावा एसडीएम सदर डॉ. राजदीप सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिव चौधरी, ग्राम पंचायत बामटा के प्रधान विक्रम ठाकुर और नोग पंचायत के उप प्रधान संजीव उपस्थित रहे। बैठक में उपस्थित लोगों को बताया गया कि टनल के अंदर का कुछ भाग बिना किसी सपोर्ट के है। उसमें पानी का रिसाव हो रहा है, जिससे उसके गिरने की संभावना बनी हुई है। ऐसी स्थिति में न केवल टनल के अंदर बल्कि टनल के ऊपर की भूमि और अन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। इसलिए यह प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है कि किसी भी आपदा की आशंका से पहले सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएं। अतिरिक्त उपायुक्त ने उपस्थित लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों को निर्देश दिए गए कि धरने को समाप्त करें और राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना में अवरोध न डालें। उधर, बैठक में उपस्थित कौशल्या देवी ने बताया कि बैठक में उनके हक में कोई बात नहीं की गई। प्रशासन मकान की मरम्मत के लिए 12 हजार रुपये और पूरे क्षतिग्रस्त मकान के लिए 1.30 लाख रुपये मंजूर कर रहा था। इस बात को सुनकर सास की तबीयत तक खराब हो गई। उन्हें अस्पताल में ले जाना पड़ा। प्रशासन को टनल के खतरे की चिंता है, जबकि गिरने की क गार पर खड़े उनके मकानों की कोई नहीं सोच रहा है। प्रशासन मकानों का पूरा मुआवजा दे अन्यथा वह यहीं पर मर जाएंगे। बता दें कि बध्यात में बन रही टनल नंबर-17 के बाहर नोग और कुआग गांव के ग्रामीण 12 दिन से धरने पर बैठे हैं। लोगों का कहना है कि टनल निर्माण के दौरान हो रहे कंपन से पहाड़ी के ऊपर उनके मकानों में दरारें आ रही हैं। कुछ मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वह पिछले एक साल प्रशासन से उनकी भूमि अधिग्रहण करने और क्षतिग्रस्त घरों का मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है।
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