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मनाली: राज परिवार की दादी देवी हिडिंबा हारियानों-कारकूनों के साथ कुल्लू दशहरा के लिए हुईं रवाना
दशहरा उत्सव में भाग लेने के लिए कुल्लू राज परिवार की दादी देवी हिडिंबा बुधवार सुबह कुल्लू के लिए रवाना हुईं। ढुंगरी स्थित हिडिंबा मंदिर से देवी की भव्य रथयात्रा निकली गई। देवी-देवताओं का महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव 2 से 8 अक्तूबर तक मनाया जाएगा। उत्सव में लोगों के लिए देवताओं के दर्शन के साथ मनोरंजन का भी पूरा प्रबंध किया गया है। दशहरा उत्सव की सदियों पुरानी देव परंपरा का निर्वहन करने के लिए ढुंगरी गांव स्थित हिडिंबा मंदिर से देवी की ऐतिहासिक रथ यात्रा शुरू हुई। पूजा-अर्चना के बाद सैकड़ों हारियानों और कारकून रथयात्रा के साथ निकले। रथ में विराजमान देवी हिडिंबा और महर्षि मनु जहां से गुजरे, वहां दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लाइनें लग गईं। जगह-जगह प्रसाद भी वितरित किया। गुरुवार को देवी के रघुनाथ मंदिर पहुंचते ही उत्सव का आगाज हो जाएगा। मान्यता है कि देवी के बिना दशहरा उत्सव का आगाज नहीं होता। कुल्लू घाटी में दशहरे के पर्व का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है। देवी हिडिंबा का इस उत्सव में विशेष महत्व है। दशहरा देवी हिडिंबा के आगमन के बाद ही शुरू होता है। सात दिन तक चलने वाले उत्सव के दौरान देवी कुल्लू स्थित अस्थायी शिविर में रहेंगी।
पहले दिन देवी हिडिंबा का रथ कुल्लू के अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ मंदिर और कुल्लू राजमहल पहुंचेगा। राज परिवार की ओर से यहां बाकायदा अश्व पूजा होगी। सात दिन तक अस्थायी शिविर में रहने के बाद अंतिम दिन लंका दहन के बाद ही देवी वापस आएंगी। हिडिंबा माता के गुर देवी चंद ने बताया कि माता आज रात कुल्लू पहुंचेंगी और सुबह देवी का स्वागत होगा। रामशिला में देवी हिडिंबा को निमंत्रण देने के लिए छड़ी आएगी। यहां से देवी भगवान रघुनाथ के मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगी। देवी हिडिंबा के अलावा ऊझी घाटी से दर्जनों देवी-देवता दशहरा में भाग लेने के लिए आज ही रवाना हुए। गौशाल गांव से गौतम ऋषि और तक्षक नाग, नसोगी से शंख नारायण, चचोगा-अलेउ से सृष्टि नारायण सहित कई देवी-देवता उत्सव में भाग लेंगे। सभी देवता आज ही रवाना हुए हैं।
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