{"_id":"68dfc56d8b562e63c000b7df","slug":"video-mandi-ambulance-workers-protested-under-the-banner-of-citu-warned-of-going-on-an-indefinite-strike-2025-10-03","type":"video","status":"publish","title_hn":"Mandi: सीटू के बैनर तले एंबुलेंस कर्मचारियों ने जताया विरोध, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की दी चेतावनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi: सीटू के बैनर तले एंबुलेंस कर्मचारियों ने जताया विरोध, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की दी चेतावनी
बीती रात 8 बजे से 102 और 108 एंबुलेंस के कर्मचारी 24 घंटे की सांकेतिक हड़ताल पर हैं। मंडी जिले में इस सेवा के तहत 150 के करीब कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहें हैं। इनका कहना है कि इस हडताल के बावजूद भी उनकी मांगों पर गौर नहीं किया जाता है तो अनिश्चितकालीन हड़ताल करने से भी वे गुरेज नहीं करेंगे। इस मौके पर इन कर्मचारियों ने मंडी शहर में आक्रोश रैली निकाली और जमकर नारेबाजी भी की। सीटू के बैनर तले इन कर्मचारियों ने विरोध रैली में भाग लिया और रोजगार नियमों के विपरीत उनसे काम करवाने के भी आरोप जड़े। इसके बाद उन्होंने उपायुक्त के माध्यम से निदेशक नेशनल हेल्थ मिशन शिमला को एक ज्ञापन भी प्रेषित किया। 102 और 108 एंबुलेंस यूनियन के जिला प्रधान सुमित कुमार ने कहा कि कंपनी सहित सरकार भी इनके साथ सौतेले व्यवहार कर रही है। मांगों को पूरा करने के बजाय इन पर एस्मा कानून थोपने का कार्य किया जा रहा है। जबकि कर्मचारियों की मांगों को पूरा न करने पर सरकार को संबंधित कंपनी और एनएचएम पर भी एस्मा लगाना चाहिए। आश्वासन मिलने के बाद भी आज उन्हें न्यूनतम गुजारा भत्ता तक नहीं मिल रहा है और न ही कोई मेडिकल सुविधा दी जा रही है। नियोक्ता कंपनी मेंडसवान फाउंडेशन सोलन को छह महीने पहले अपनी मांगों के संबंध में एक मांगपत्र सौंपा था। इन मांगों को लागू करवाने के लिए 28 मई को भी एक दिन की हड़ताल की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने पिछले चार महीनों में मांगें पूरी नहीं की हैं, जिसके कारण आज यूनियन को दोबारा हड़ताल करने पर मजबूर होना पड़ा है।मरीजों को हो रही असुविधा के लिए मेंडसवान फाउंडेशन कंपनी ही जिम्मेदार है। 2020 में न्यायलय ने कर्मचारियों के हक में फैसला सुनाया था, जो आज दिन तक पूरा नहीं हुआ है। इस हड़ताल के बाद भी उनकी मांगो पर गौर नहीं किया जाता है तो कर्मचारी और अधिक कठोर कदम उठाने पर मजबूर होंगे।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
$video_url='';
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।