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Mandi Himachal Pradesh Corporate Sector Pensioners Joint Front formed in Mandi reminded government of election promise
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Mandi: मंडी में हिमाचल प्रदेश कॉरपोरेट सेक्टर पेंशनर्स संयुक्त फ्रंट गठित, सरकार को याद दिलाया 'चुनावी वादा'
हिमाचल प्रदेश के कॉरपोरेट सेक्टर (विभिन्न निगमों और बोर्डों) के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपने हक की लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर ले जाने का बिगुल फूंक दिया है। लंबे समय से पेंशन बहाली और अन्य वित्तीय लाभों की बाट जोह रहे सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने मंडी में आयोजित एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय अधिवेशन में अपनी आवाज बुलंद की। इस दौरान संगठन की मजबूती के लिए पुरानी समन्वय कमेटी और एक्शन कमेटी को भंग कर नई प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया और सरकार को आगाह किया गया कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। निर्णय लिया गया कि सभी पेंशनर नेता आत्मा राम के गुट के साथ मिलकर मुख्यमंत्री से मिलेंगे और अपनी मांग प्रमुखता से उठाएंगे। अधिवेशन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करते हुए 'हिमाचल प्रदेश कॉरपोरेट सेक्टर पेंशनर्स संयुक्त फ्रंट' की नई कमान सौंपी गई। अनुभवी नेता बी.एस. चौहान को प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है। उनके साथ वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में जोगिंदर सारटा और महासचिव के पद पर एन.के. बाली को जिम्मेदारी दी गई है। संगठन की बात जनता और सरकार तक पहुँचाने के लिए कमलेश शांडिल को मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। इसके अलावा केवल चौहान को मुख्य संगठन सचिव और दौलत ठाकुर को मुख्य कैशियर बनाया गया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी जिलों के प्रधान और महासचिव इस कार्यकारिणी में सदस्य के तौर पर जुड़कर जमीनी स्तर पर कार्य करेंगे। बाकी कार्यकारिणी का अधिकार प्रधान को दिया गया। बैठक में वक्ताओं ने पेंशन के इतिहास और वर्तमान स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त किया। बाद में मीडिया से बात करते हुए है प्रधान बी एस चौहान ने कहा कि कॉरपोरेट सेक्टर में पेंशन की प्रणाली 1 अप्रैल 1999 से लागू की गई थी लेकिन 30 नवंबर 2004 के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए इस सुविधा को बंद कर दिया गया, जिससे हजारों कर्मचारियों का बुढ़ापा असुरक्षित हो गया है। केवल 1999 से लेकर 2004 के बीच सेवानिवृत्त कमर्चारियों को ही इसका लाभ मिला और अभी तक उन्हें मिल रहा है लेकिन 2004 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ये लाभ नहीं दिये जा रहे हैं। वर्तमान में लगभग 6,730 कर्मचारी ऐसे हैं जो इस व्यवस्था से प्रभावित हैं, जबकि 627 पेंशनभोगी पहले ही अपने हकों के इंतज़ार में दुनिया छोड़ चुके हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने कहा कि 18 अगस्त को हुए एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा पेंशन बहाली का भरोसा दिलाया गया था। संगठन ने नारा दिया है "अपना वादा निभाएं मुख्यमंत्री"। सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अपना पूरा जीवन प्रदेश के विकास और विभिन्न निगमों की सेवा में लगा दिया, लेकिन आज जब उन्हें सबसे अधिक आर्थिक सुरक्षा की आवश्यकता है, तो उन्हें दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। पेंशन बहाली के अलावा अधिवेशन में अन्य ज्वलंत मुद्दों पर भी चर्चा हुई जिसमें कर्मचारियों ने मांग की है कि 1 जनवरी 2016 से लंबित मेडिकल भत्ते का भुगतान तुरंत किया जाए। बढ़ती उम्र में स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए यह भत्ता अत्यंत आवश्यक है। नवनियुक्त अध्यक्ष भीम सिंह चौहान ने कहा कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है। मुख्यमंत्री ने स्वयं कहा था वे भी एक पेंशनधारक कर्मचारी के बेटे हैं और उनका परिवार उसी पेंशन के सहारे चला। आज हमें पूर्ण विश्वास है कि जिस प्रकार उन्होंने पुरानी पेंशन बहाली का अपना वायदा निभाया उसी तरह वो कारपोरेट सेक्टर्स के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन की मांग को भी पूरा करेंगे। संगठन अब ब्लॉक और जिला स्तर पर जाकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एकजुट करेगा ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके। जिला की कोई कार्यकारिणी भंग नहीं हुई है। सिर्फ समन्वय कमेटी और एक्शन कमेटी को भंग कर संयुक्त मोर्चा गठित हुआ है जो जल्द पेंशनर नेता आत्मा राम की अगुवाई में 18 से 20 जनवरी में के बीच मुख्यमंत्री से मिलने जाएगा।
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