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कुटलैहड़: टक्का गांव के किसान सतीश सैणी ने प्राकृतिक खेती से तैयार किया 18 फीट लंबा गन्ना
कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव टक्का के प्रगतिशील किसान सतीश सैणी ने प्राकृतिक खेती के माध्यम से 18 फुट लंबा गन्ना तैयार कर मिसाल कायम की है। सीमित भूमि में आधुनिक सोच और पारंपरिक संसाधनों के समन्वय से उन्होंने गन्ने की ऐसी फसल तैयार की है, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। सतीश सैणी ने अपनी लगभग पांच कनाल भूमि में गन्ने की उन्नत किस्म (17-4-31) की खेती की। प्राकृतिक पद्धति अपनाते हुए उन्होंने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से दूरी बनाए रखी। इसके स्थान पर देसी गाय के गोबर से बनी जैविक खाद, जीवामृत, घनजीवामृत तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल किया। नियमित निराई-गुड़ाई, समय पर सिंचाई और फसल की निरंतर निगरानी के कारण गन्ने की लंबाई करीब 18 फुट तक पहुंच गई, जो क्षेत्र में असाधारण मानी जा रही है। किसान सैणी का दावा है कि इस फसल से लगभग चार लाख रुपये तक की आय होने की संभावना है। यदि उत्पादन और विपणन उम्मीद के अनुसार सफल रहा, तो यह मॉडल छोटे किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से न केवल भूमि की उर्वरता बढ़ती है, बल्कि लागत भी कम होती है, जिससे शुद्ध लाभ में वृद्धि होती है। गांव टक्का और आसपास के क्षेत्रों के किसान भी उनकी खेती देखने पहुंच रहे हैं और प्राकृतिक खेती की तकनीकों के बारे में जानकारी ले रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस प्रकार की खेती को प्रोत्साहन मिले, तो पूरे कुटलैहड़ क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। सतीश सैणी की यह उपलब्धि दर्शाती है कि सीमित भूमि, सीमित संसाधन और सच्ची लगन के साथ भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। उनकी मेहनत और नवाचार ने यह साबित कर दिया है कि भविष्य प्राकृतिक खेती का है, और यही मार्ग किसानों को आत्मनिर्भरता की ओर ले जा सकता
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