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After Dhankhar, now CP Radhakrishnan, what is the reason behind BJP's changed strategy?
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धनखड़ के बाद अब सीपी राधाकृष्णन, भाजपा की बदली रणनीति की क्या है वजह?
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Mon, 18 Aug 2025 07:55 PM IST
आज चर्चा उस बड़े राजनीतिक फैसले की, जिसने सबका ध्यान खींचा है। भाजपा ने उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है नाम है सीपी राधाकृष्णन। अब जरा सोचिए, जहां जगदीप धनखड़ अपनी तेज-तर्रार और मुखर राजनीति के लिए जाने जाते थे, वहीं राधाकृष्णन एक सौम्य और समावेशी चेहरे के रूप में सामने आए हैं। सवाल यह है कि भाजपा ने आख़िर इस बदलाव का दांव क्यों खेला? क्या यह ओबीसी समीकरण और दक्षिण भारत की राजनीति से जुड़ी चाल है या फिर संसद के उच्च सदन में संतुलन की रणनीति?
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आखिरकार उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार का नाम घोषित कर दिया है। पार्टी ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और वरिष्ठ नेता सीपी राधाकृष्णन को मैदान में उतारकर न केवल अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं बल्कि रणनीति में बड़ा बदलाव भी दिखाया है। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जहां अपने मुखर और टकरावपूर्ण तेवरों के लिए जाने जाते थे, वहीं सीपी राधाकृष्णन एक सौम्य, समावेशी और शांत स्वभाव वाले नेता माने जाते हैं। भाजपा का यह कदम कई मायनों में दूरगामी रणनीति की ओर इशारा करता है।
अब जरा नजर इस पर डालते है की आखिर भाजपा की रणनीति में क्या बदलाव आया है?
बात है साल 2022 की जब जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना गया था, तब उनकी आक्रामक छवि को राजनीतिक लाभ से जोड़ा गया। वे कांग्रेस और वामपंथी राजनीति से होकर भाजपा में आए और जाट समुदाय को संदेश देने के लिहाज से उनकी उम्मीदवारी अहम थी। लेकिन अब भाजपा ने बिलकुल विपरीत व्यक्तित्व वाले नेता को चुना है।
सीपी राधाकृष्णन का स्वभाव सौम्य और संतुलित है। वे संघ की विचारधारा से किशोरावस्था से जुड़े रहे हैं और संगठनात्मक पृष्ठभूमि वाले अनुभवी नेता हैं। ऐसे में यह चुनाव भाजपा की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें अब पार्टी संसद के उच्च सदन में एक संतुलनकारी चेहरा चाहती है।
राधाकृष्णन का ताल्लुक तमिलनाडु से है और वे ओबीसी वर्ग से आते हैं। यह भाजपा की ओबीसी सोशल इंजीनियरिंग को मजबूती देता है। भाजपा अभी तक कर्नाटक को छोड़कर दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर सफलता हासिल नहीं कर पाई है। तमिलनाडु में अगले डेढ़ साल में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इस चुनावी नियुक्ति से भाजपा को दक्षिण भारत के मतदाताओं को साधने में मदद मिल सकती है। साथ ही विपक्ष के लिए उनका विरोध करना आसान नहीं होगा क्योंकि उनका राजनीतिक करियर विवादों से लगभग अछूता रहा है।
राधाकृष्णन बनाम धनखड़: दोनों की शैली काफी अंतर है।
जगदीप धनखड़ की पहचान एक उग्र वकील और मुखर नेता के तौर पर रही। बंगाल के राज्यपाल रहते हुए उनका लगातार ममता बनर्जी सरकार से टकराव होता रहा। विपक्ष भी उन पर पक्षपात और निष्पक्ष न होने का आरोप लगाता रहा। वहीं, सीपी राधाकृष्णन की छवि इसके बिल्कुल उलट है। वे शांत, संयमित और संवादप्रिय नेता माने जाते हैं। माना जा रहा है कि उनकी यही शैली राज्यसभा में गरिमा और संतुलन बनाए रखने में सहायक होगी।
भाजपा ने सीपी राधाकृष्णन का नाम आगे करके यह संदेश भी देने की कोशिश की है कि वह अब दक्षिण और ओबीसी समाज की आकांक्षाओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए गंभीर है। साथ ही संघ से उनके गहरे जुड़ाव ने उन्हें पार्टी और संगठन दोनों का भरोसेमंद उम्मीदवार बना दिया है।
सोमवार को दिल्ली पहुंचे सीपी राधाकृष्णन का स्वागत केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू, प्रह्लाद जोशी, भूपेंद्र यादव सहित कई नेताओं ने किया। वे शाम को होने वाली एनडीए की बैठक में शामिल होंगे, जिसमें नामांकन और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनका नाम घोषित करते हुए कहा था कि भाजपा चाहती है यह चुनाव सर्वसम्मति से हो और इसके लिए विपक्षी दलों से भी संपर्क किया जा रहा है।
चलिए अब कुछ बिंदुओं में समझते है राधाकृष्णन का राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन
• 68 वर्षीय राधाकृष्णन वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं।
• इससे पहले वे झारखंड और तेलंगाना के राज्यपाल तथा पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाल चुके हैं।
• झारखंड के राज्यपाल रहते हुए उन्होंने चार महीनों में सभी 24 जिलों का दौरा किया और जनता से सीधा संवाद स्थापित किया।
• वे दो बार कोयंबटूर से लोकसभा सांसद रह चुके हैं और तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।
• 2004 से 2007 तक उन्होंने 93 दिनों में 19,000 किलोमीटर लंबी ‘रथ यात्रा’ निकाली, जिसमें समान नागरिक संहिता, आतंकवाद उन्मूलन, नशे के खिलाफ लड़ाई और नदियों को जोड़ने जैसी मांगों को उठाया।
• 1957 में जन्मे राधाकृष्णन ने बीबीए की पढ़ाई की और कॉलेज स्तर पर टेबल टेनिस व एथलेटिक्स में सक्रिय खिलाड़ी रहे।
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए 21 जुलाई को इस्तीफा दिया था, जिससे यह पद रिक्त हो गया। चुनाव आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए 9 सितंबर को मतदान और मतगणना दोनों होंगी। भाजपा-एनडीए के पास संख्याबल के लिहाज से बढ़त है, ऐसे में राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
सीपी राधाकृष्णन की उम्मीदवारी भाजपा की उस राजनीति का हिस्सा है जिसमें अब संतुलन, समावेश और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने पर जोर है। धनखड़ की आक्रामक राजनीति के बाद राधाकृष्णन का सौम्य और संघनिष्ठ चेहरा भाजपा के लिए उच्च सदन में एक नई शैली लेकर आएगा। ओबीसी और दक्षिण भारत पर फोकस के साथ यह दांव भाजपा की भविष्य की रणनीति का संकेत है।
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