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Video: लखनऊ...ऐतिहासिक 'इमारत रिहा ए आम', नवाब ने 1860 में कराया था निर्माण
लखनऊ की ऐतिहासिक इमारत रिहा ए आम जिसका निर्माण यहां के नवाब ने 1860 में कराया था। आज बिल्कुल जर्जर हालत में है। हिंदी और उर्दू की साहित्यिक बैठकों के लिए इसका निर्माण कराया गया था। यह भारतीय राष्ट्रवाद और अन्य बौद्धिक गतिविधियों के केंद्रों में से एक था, जहाँ मुंशी प्रेमचंद और मोहम्मद अमीर अहमद खान जैसे व्यक्ति अक्सर आते थे।
1900 के दशक में यहां अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की बैठकें आयोजित की जाती थीं । क्लब में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग की बैठक हुई, जिसके परिणामस्वरूप 1916 का लखनऊ समझौता हुआ , जिस पर परिसर में ही हस्ताक्षर किए गए थे।
महात्मा गांधी ने 15 अक्टूबर 1920 को हिंदू-मुस्लिम एकता पर भाषण देने के लिए इस इमारत का दौरा किया। 26 अप्रैल 1922 को जवाहरलाल नेहरू और वल्लभभाई पटेल ने क्लब में भाषण देकर स्थानीय लोगों को स्वदेशी आंदोलन को तेज करने के लिए प्रोत्साहित किया । प्रगतिशील लेखक आंदोलन की स्थापना 10 अप्रैल 1936 को यहीं पर हुई थी।
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