बड़वानी जिले के पाटी विकासखंड की ग्राम पंचायत उबादगढ़ के खोड़ी पलास फलिया में करीब 30 से 35 मकानों में 250 से अधिक लोग निवास करते हैं। इस बस्ती को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला रास्ता लंबे समय से खराब स्थिति में था। बारिश के दौरान मार्ग कीचड़ और पानी से भर जाता था, जिससे गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से लगभग कट जाता था। बच्चों को स्कूल पहुंचने, किसानों को कृषि उपज बाजार तक ले जाने और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण की मांग को लेकर पंचायत, जनपद पंचायत, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को कई बार आवेदन दिए गए। जनसुनवाई में भी समस्या रखी गई, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला। चुनाव के दौरान सड़क निर्माण के वादे किए गए, लेकिन समय बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी रही। लगातार इंतजार के बाद ग्रामीणों ने स्वयं सड़क निर्माण का निर्णय लिया।
चंदा, जेसीबी और श्रमदान से तैयार हो रहा मार्ग
सड़क निर्माण को लेकर गांव में बैठक आयोजित की गई, जिसमें युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं ने भाग लिया। बैठक में तय किया गया कि अब किसी अन्य सहायता का इंतजार नहीं किया जाएगा। इसके बाद घर-घर जाकर सहयोग राशि एकत्र की गई। आर्थिक रूप से सक्षम लोगों ने दस-दस हजार रुपये तक का योगदान दिया, जबकि अन्य ग्रामीणों ने अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग किया। कुछ लोगों ने नकद राशि दी तो कुछ ने डीजल, मशीन और अन्य संसाधनों की व्यवस्था में मदद की।
एकत्र किए गए चंदे से जेसीबी मशीन बुलाकर पहाड़ी क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य शुरू किया गया। जेसीबी की सहायता से मार्ग की सफाई, समतलीकरण और बड़े पत्थरों को हटाने का कार्य किया जा रहा है। दूसरी ओर ग्रामीण फावड़े, कुदाल और तसलों के साथ श्रमदान कर रहे हैं। युवाओं ने दो टीमें बनाई हैं, जिनमें प्रतिदिन 35 से 40 ग्रामीण सड़क निर्माण में भाग ले रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से लगातार कार्य जारी है और अब तक लगभग आधा किलोमीटर सड़क तैयार हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि शेष डेढ़ किलोमीटर मार्ग भी जल्द तैयार कर लिया जाएगा।
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महिलाओं की भागीदारी और पक्की सड़क की मांग
ग्रामीण साजिया ने बताया कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद गांव वालों ने चंदा इकट्ठा कर जेसीबी लगाई और स्वयं सड़क निर्माण शुरू किया। वहीं रोमा बाई ने कहा कि बरसात के समय रास्ता बंद हो जाता था, जिससे बच्चों की पढ़ाई और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भारी दिक्कत होती थी। इसी कारण ग्रामीणों ने मिलकर सड़क बनाने का निर्णय लिया।
सड़क निर्माण में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिल रही है। कई महिलाएं श्रमदान के साथ कार्यरत लोगों के लिए पानी और भोजन की व्यवस्था संभाल रही हैं। ग्रामीण मोहन और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से विद्यार्थियों, किसानों और मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा। गांव के युवाओं ने इस पहल को जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया है तथा गांव से बाहर रहने वाले लोगों ने भी आर्थिक सहयोग भेजा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सड़क निर्माण नहीं बल्कि गांव के बेहतर भविष्य की नींव रखने का प्रयास है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि यदि प्रशासन और संबंधित विभाग समय पर ध्यान देते तो उन्हें स्वयं चंदा और श्रमदान के सहारे सड़क निर्माण नहीं करना पड़ता। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मार्ग का सर्वे कराया जाए और इसे किसी सरकारी योजना में शामिल कर जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए।