नर्मदापुरम जिले के डोलारिया थाना क्षेत्र के ग्राम कजलास में रविवार को अवैध शराब कारोबार के खिलाफ महिलाओं का गुस्सा उस समय फूट पड़ा, जब शराब से भरी एक बोलेरो गांव में पहुंची। गांव की महिलाओं ने न सिर्फ शराब माफियाओं का रास्ता रोका, बल्कि वाहन के सामने सड़क पर बैठकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। महिलाओं और ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश को देखकर शराब तस्करों के हाथ-पांव फूल गए और वे बोलेरो को मौके पर छोड़कर फरार हो गए। गांव में अचानक हुए इस घटनाक्रम ने इलाके में सनसनी फैला दी।
बताया जा रहा है कि गांव में अवैध अंग्रेजी शराब की खेप पहुंचने की सूचना मिलते ही महिलाएं, ग्रामीण और ग्राम रक्षा समिति के सदस्य एकजुट होकर मौके पर पहुंच गए। महिलाओं ने साहस का परिचय देते हुए शराब से भरे वाहन को चारों तरफ से घेर लिया। विरोध इतना तीव्र था कि तस्करों को भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं सूझा। इसके बाद ग्रामीणों ने सड़क पर धरना देकर प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। ग्रामीणों का कहना था कि लंबे समय से गांवों में खुलेआम अवैध शराब पहुंच रही है, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियां प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम रही हैं।
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सूचना मिलने पर डोलारिया पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को कार्रवाई का भरोसा देकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस बोलेरो वाहन को थाने ले गई, जहां जांच के दौरान शराब परिवहन से जुड़े कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले। तलाशी में वाहन से सात पेटियों में रखी अलग-अलग ब्रांड की अंग्रेजी शराब बरामद हुई। पुलिस ने कुल 42.66 लीटर अवैध शराब जब्त करते हुए आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। जब्त शराब और बोलेरो वाहन की अनुमानित कीमत करीब 8 लाख रुपये बताई जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने जिले में सक्रिय अवैध शराब नेटवर्क पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शराब माफिया बेखौफ होकर गांव-गांव तक शराब पहुंचा रहे हैं और इससे युवा पीढ़ी के साथ-साथ परिवार भी प्रभावित हो रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि अवैध शराब ने कई घरों की खुशियां छीन ली हैं, इसलिए अब वे खुद मैदान में उतरकर इस कारोबार के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगी। कजलास की यह घटना सिर्फ एक शराब तस्करी पकड़ने की कहानी नहीं, बल्कि गांव की महिलाओं द्वारा शराब माफियाओं को खुली चुनौती देने का संदेश भी बन गई है। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में अवैध शराब का यह कारोबार गांवों तक पहुंच रहा है और इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रशासन कब तक सख्त कदम उठाएगा।