बुरहानपुर जिले में बारिश ने जहां ग्रामीण इलाकों में जनजीवन प्रभावित किया है, वहीं ग्राम साजनी में अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी बदहाल हालात की भेंट चढ़ गई है। श्मशान घाट तक पहुंचने वाला कच्चा रास्ता कीचड़ और गड्ढों से भरा है, जबकि डेम क्षेत्र में बने श्मशान घाट के चारों तरफ बारिश का पानी जमा होने से अंतिम यात्रा तक जोखिम भरी हो गई है। हालात इतने खराब हैं कि अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी लेकर पहुंची पिकअप के पहिए तक पानी में डूब गए। ग्रामीणों के मुताबिक, वर्तमान में श्मशान घाट के आसपास करीब दो से तीन फीट पानी भरा हुआ है। बारिश अधिक होने पर पानी चार फीट या उससे भी ऊपर पहुंचने की स्थिति बन जाती है। ऐसे में शव को श्मशान घाट तक ले जाना परिजनों और ग्रामीणों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है।
अंतिम विदाई के वक्त भी संघर्ष
ग्रामीण विनोद कुमार, जितेंद्र, जवारकर, उमेश और संजू ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि बारिश के दिनों में श्मशान घाट तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। रास्ते में कीचड़ और गड्ढों के कारण लोगों को संभलकर चलना पड़ता है। वहीं श्मशान घाट के आसपास पानी भर जाने से परेशानी और बढ़ जाती है। सबसे चिंताजनक तस्वीर उस समय सामने आई, जब अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी लेकर पहुंची पिकअप के चारों पहिए पानी में धंस गए। ग्रामीणों ने किसी तरह लकड़ी को श्मशान घाट तक पहुंचाया।
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वर्षों पुरानी समस्या, अब तक स्थायी समाधान नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। बारिश के मौसम में हर साल उन्हें इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। पंचायत के सरपंच और सचिव को भी समस्या से अवगत कराने की बात ग्रामीणों ने कही, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि श्मशान घाट और रास्ते का तत्काल निरीक्षण कर पक्का एवं सुरक्षित मार्ग बनाया जाए। साथ ही डेम क्षेत्र में बने श्मशान घाट की जगह का भी पुनर्विचार कर ऐसी सुरक्षित जगह पर व्यवस्था विकसित की जाए, जहां बारिश और डेम का पानी जमा न हो।
अब जिम्मेदारों से बड़ा सवाल
जब अंतिम यात्रा के दौरान भी ग्रामीणों को पानी और कीचड़ के बीच से गुजरना पड़े, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले और श्मशान घाट तक सुरक्षित पहुंच, जल निकासी तथा स्थायी निर्माण की व्यवस्था करे। ग्रामीणों का कहना है कि किसी परिवार को अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देते समय रास्ते की इस परेशानी और दुर्घटना के खतरे से नहीं जूझना चाहिए। अब देखना होगा कि वर्षों पुरानी इस समस्या पर जिम्मेदार कब जागते हैं और साजनी के ग्रामीणों को कब तक स्थायी राहत मिलती है।

जिस चबूतरे पर चिता जलती है, उसके आसपास काफी पानी भरा है।
तस्वीर में दिख रहे हालात