दमोह जिले के पथरिया विकासखंड स्थित नरसिंहगढ़ की माइसेम सीमेंट फैक्टरी में गुरुवार शाम अवैध मादक पदार्थों के विनष्टीकरण की कार्रवाई की गई। इस दौरान दमोह और पन्ना जिलों में विभिन्न मामलों में जब्त किए गए 78 किलो गांजे को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नष्ट किया गया।
यह कार्रवाई न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद संपन्न हुई। विनष्टीकरण प्रक्रिया के दौरान सागर रेंज के डीआईजी शशीन्द सिंह चौहान, दमोह एसपी आनंद कलादगी, पन्ना एसपी निवेदिता नायडू, सीएसपी एचआर पांडे, देहात थाना प्रभारी अमित गौतम, सरोज ठाकुर, मगरोन थाना प्रभारी बृजलाल पटेल, नरसिंहगढ़ चौकी प्रभारी रोहित द्विवेदी सहित फैक्ट्री प्रबंधन की टीम मौजूद रही।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह एक नियमित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया होती है। वर्षभर में पुलिस द्वारा एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए जाते हैं। जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत की अनुमति से इन पदार्थों को सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाता है, ताकि उनका दोबारा दुरुपयोग न हो सके।
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क्यों जरूरी होती है, विनष्टीकरण की कार्रवाई
मादक पदार्थों के विनष्टीकरण का सबसे बड़ा उद्देश्य समाज में नशे के अवैध कारोबार पर नियंत्रण बनाए रखना है। यदि जब्त सामग्री लंबे समय तक सुरक्षित भंडारण में रखी जाए तो उसके चोरी होने, दोबारा अवैध बाजार में पहुंचने या दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है। इसी कारण न्यायालय की निगरानी और निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत इन्हें नष्ट किया जाता है।
इसके अलावा यह प्रक्रिया पुलिस रिकॉर्ड, न्यायालयीन पारदर्शिता और जब्त सामग्री के अंतिम निस्तारण का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। फैक्ट्री में उच्च तापमान पर इन मादक पदार्थों को जलाकर पूरी तरह नष्ट किया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी जब्त मादक पदार्थों के मामलों में इसी प्रकार विनष्टीकरण की कार्रवाई जारी रहेगी।