23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी पर्व के अवसर पर धार की ऐतिहासिक भोजशाला में हिंदू समाज सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड दर्शन, पूजन, हवन और धार्मिक आयोजनों को लेकर संकल्पबद्ध है। इसी को लेकर आज महाराजा भोज स्मृति बसंत उत्सव समिति, धारा नगरी द्वारा संवाद केंद्र कार्यालय का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में समिति के सदस्यों ने बसंत पंचमी के दिन होने वाले आयोजनों की विस्तृत रूपरेखा साझा की। समिति ने स्पष्ट किया कि बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय के साथ पूजा-अर्चना शुरू होगी, जो परंपरा अनुसार सूर्यास्त तक निर्विघ्न रूप से जारी रहेगी। बसंत पंचमी के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह होंगे। आज के कार्यक्रम में उपस्थित संत रामेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि बसंत पंचमी पर भोजशाला में पूरे दिन पूजा होगी। उन्होंने कहा कि भोजशाला में ‘शाला’ शब्द स्वयं सनातन संस्कृति का प्रतीक है और यहां मौजूद प्रतिमाएं इस बात का प्रमाण हैं कि यह स्थल सनातन परंपरा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार अपना काम करे, हम अपना काम करेंगे।
समिति के संरक्षक अशोक जैन ने कहा कि आगामी बसंत पंचमी पर्व परंपरा अनुसार ही मनाई जाएगी। सुबह से शाम तक अखंड पूजा और महा आरती होगी। उन्होंने कहा कि पहले भी जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी है, तब भोजशाला खाली नहीं की गई और इस बार भी हिंदू समाज अखंड पूजा करेगा। भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति के गोपाल शर्मा ने बताया कि वर्ष 1952 से महाराजा भोज स्मृति वसंत उत्सव समिति द्वारा बसंत उत्सव मनाया जा रहा है और यह परंपरा लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि इस बार भी सूर्योदय से हवन-पूजन, दोपहर में शोभायात्रा, विभिन्न संस्कार और शाम को पूर्णाहुति की जाएगी।
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समिति के संरक्षक हेमंत दौराया ने स्पष्ट किया कि भोज उत्सव समिति की किसी भी अधिकारी या मंत्री से कोई चर्चा नहीं हुई है और बसंत पंचमी पर भोजशाला में पूजा परंपरा अनुसार अखंड रूप से दिनभर होगी। फिलहाल भोज उत्सव समिति के आयोजनों को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। उल्लेखनीय है कि जब-जब बसंत पंचमी शुक्रवार को आती है, तब भोजशाला को लेकर धार शहर सहित पूरे जिले में तनाव की स्थिति बनती रही है। एक ओर जहां मुस्लिम समाज शुक्रवार को भोजशाला में नमाज पढ़ने की मांग करता रहा है, वहीं हिंदू समाज पूर्व में जारी पुरातत्व विभाग के निर्देशों के अनुसार बसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा की बात करता आया है।
ऐसे में एक बार फिर शुक्रवार को पड़ने वाली बसंत पंचमी को लेकर पूरे जिले में सतर्कता का माहौल है, हालांकि आमजन यह उम्मीद जता रहे हैं कि इस बार आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होगा और किसी भी प्रकार की विवाद की स्थिति नहीं बनेगी।