पद्म भूषण से सम्मानित, सेवा, संस्कार, स्वाभिमान, राष्ट्र एवं हिंदुत्व जागरण की प्रखर वक्ता साध्वी ऋतंभरा एक दिवसीय दौरे पर धार पहुंचीं। साध्वीश्री ने कोर्ट से निर्णय आने के बाद पहली मर्तबा भोजशाला में दर्शन व पूजन किया। भोजशाला मुक्ति आंदोलन के शुरुआती दिनों में साध्वी ऋतंभरा द्वारा हिंदुओं में अलख जगाया गया था। गुरुवार दोपहर के समय भोजशाला के गर्भगृह में मां वाग्देवी के चित्र की पूजा-अर्चना वैदिक मंत्रोच्चार से साध्वी ऋतंभरा ने की। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति मौजूद रहीं। पूजन के समय पूरे परिसर में जय श्रीराम और मां वाग्देवी के जयघोष गूंजते रहे। साध्वी ऋतंभरा ने पूजा-अर्चना कर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। पूजन के बाद भोज उत्सव समिति द्वारा दीदी मां का सम्मान भी किया गया।
राजा भोज पहले आए
पूजन के बाद साध्वी ऋतंभरा ने हिंदू समाज को संबोधित करते हुए कहा कि प्रह्लाद आग में जलाए गए, पर जला नहीं पाए गए। इसी तरह भोजशाला का सत्य, अग्नि परीक्षाओं से गुजर-गुजर के उस सत्य को, उसके पक्ष को समझते हुए भोजशाला हिंदू समाज को सौंपी गई है। साधारण सी बुद्धि की बात है कि तथाकथित मौलाना पहले हुए थे या राजा भोज पहले हुए थे? राजा भोज पहले हुए थे, इतिहास कह रहा है। हम दोबारा राजा भोज के समय का वैभव यहां देखेंगे। वैभव क्या होता है? बिल्डिंगों से नहीं वैभव होता, बिल्डिंगें भी वैभव को व्यक्त करने का एक मार्ग होती हैं, इमारतें। लेकिन इस धरती ने ज्ञान और विज्ञान से, काव्य से, संगीत से और कला से पूरे भारत को शृंगारित किया था। भारतीयों की जो संतानें हैं, वे तुलसी के पौधे हैं, जिनको वासनाओं की शराबों से नहीं, संस्कारों के गंगाजल से सींचा जाना चाहिए। भोजशाला, ये स्थान पूरे भारत का नेतृत्व करेगी, ऐसा हमें दिखाई देता है। बहुत जल्दी सब कुछ होगा, भगवती आना चाहती हैं।
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संघर्ष करके विवश करना था
मीडिया को चर्चा में साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि सबसे बड़ी बात है, हमारी युवा पीढ़ी बहुत बड़ी मात्रा में नहीं, लेकिन बहुत बड़ी संख्या में ऐसे भी बच्चे हैं, जिनके मुंह पर अपशब्द आ गए हैं और लड़कियां तक मां-बहनों को गालियां देती हैं। जिन लड़कियों को संघर्ष करना चाहिए था, कि वो सरकारों को विवश करतीं, कि मां-बहन की गाली देने पे दंड मिलना चाहिए, वो स्वयं मां-बहन की गालियां दे रही हैं। जब हमारा अंतःकरण इतना दूषित होकर अपशब्द और अपसंस्कृति का हम वर्णन कर रहे हैं, तो मां अधीर होकर कह रही है कि मुझे लंदन से चलकर धार आना ही होगा, क्योंकि मैं भारत को भारत बनाए रखना चाहती हूं, इसलिए भगवती जल्दी आएंगी।