गुना जिले में राघौगढ़ विकास खंड के ग्राम पीपलखेड़ी में स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के महान सेनानी टंट्या मामा की प्रतिमा अनावरण से पहले ही जिला प्रशासन ने बेरीकेट्स लगा दिए हैं। भील समाज द्वारा स्थापित इस प्रतिमा का अनावरण तीन मार्च को मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह करने वाले थे। इससे पहले प्रशासन की हठधर्मिता और कार्यप्रणाली की वजह से संपूर्ण भील समाज में आक्रोश व्याप्त हो गया है। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने भी भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है।
जानकारी के मुताबिक, राघौगढ़ विकास खंड की ग्राम पंचायत पीपलखेड़ी स्थित शबरी चौराहे पर भील-आदिवासी समाज ने क्रांतिकारी टंट्या मामा की प्रतिमा लगाने का निर्णय लिया था। इसके लिए क्षेत्र के सभी आदिवासी-भील समाज द्वारा थोड़ी-थोड़ी राशि एकत्रित की गई और चौराहे से दूर एक खाली जगह चिन्हित कर वहां प्रतिमा स्थापित करने पर सहमति बनाई और ग्राम पंचायत पीपलखेड़ी से अनुमति प्राप्त कर कार्य शुरू किया।
समाजजनों द्वारा शबरी चौराहे के समीप ऐसे जगह को चुना गया था, जिससे न तो यातायात बाधित हो रहा था और न ही किसी अन्य तरह की गतिविधि प्रभावित हो रही थी। इस खाली जगह पर टंट्या मामा की प्रतिमा स्थापित कर दी गई और अनावरण की तैयारियां जारी थीं। 1 मार्च को जब समाजजन अनावरण कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे हुए थे। इसी समय प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रतिमा स्थापित करने की प्रक्रिया को गैर कानूनी करार देते हुए प्रतिमा के आसपास बेरीकेट्स लगवा दिए। इस घटनाक्रम की जानकारी जैसे जैसे फैलती गई भील समाज में नाराजगी बढ़ती गई।
दिग्विजय ने मांगी स्वीकृति की प्रक्रिया, उपलब्ध नहीं करा पाया प्रशासन
भील-आदिवासी समाज से मिली जानकारी के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रतिमा स्थापित करने की प्रक्रिया जिला प्रशासन से मांगी जो उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है। दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने कलेक्टर गुना, एसडीएम राघौगढ़ से पूछा तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन होने की जानकारी दी गई। उन्होंने प्रदेश शासन की स्वीकृति संबंधी प्रक्रिया मांगी तो नहीं दी गई। सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेश मांगे, तो एक प्रति बीती रात उन्हें भेज दी गई।
दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने आदेशों का अध्ययन किया है, दोनों वरिष्ठ अदालत के आदेश शहरों में सड़क व चौराहों पर ट्रैफिक अवरूद्ध न हो, इसको लेकर जारी किए गए हैं। पीपलखेड़ी ग्राम पंचायत है जहां प्रतिमा लगाई गई है वहाँ ट्रैफिक का आवागमन ही नही है। पंचायत ने मूर्ति लगाने की इजाजत दी है। प्रशासन से पूछा किसने ट्रैफिक अवरूद्ध होने की शिकायत की है, इसपर पर भी प्रशासन के पास जवाब नहीं थी। दिग्विजय ने लिखा कि आदिवासी समाज के आयोजकों को प्रशासन ने ऊपर से आदेश होने के संकेत दिए हैं। आजकल प्रशासन को कोई निर्णय अवैधानिक रूप से लेना पड़ता है, उसे वे ऊपर के आदेश बता देते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने पूछा है कि देश भारतीय संविधान से चलेगा या भाजपा नेताओं के ऊपर से दिए गए अवैधानिक आदेशों पर चलेगा?
एक सप्ताह रुक जाएं, धूमधाम से करेंगे अनावरण
प्रतिमा लगाने को लेकर हो रहे विवाद को देखते हुए दिग्विजय सिंह ने पीपलखेड़ी में कार्यक्रम आयोजकों से अनुरोध किया है कि वे एक सप्ताह रुक जाएं। टंट्या मामा की मूर्ति जिसे राघौगढ़, चांचौड़ा व गुना-राजगढ़ के आदिवासियों ने चंदा कर निर्माण करवाया है, उसे गैर कानूनी विवाद में नहीं डाला जाएगा। दिग्विजय सिंह ने आश्वासन दिया है कि वे मूर्ति का अनावरण धूमधाम से करेंगे। 3 मार्च को प्रशासन द्वारा बताए गए स्थान पर आदिवासी-भील समाज एकजुट हो और शांतिपूर्ण सभा कर एकता का परिचय दे।
डॉ. आनंद राय ने दी चेतावनी
पीपलखेड़ी विवाद को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ और आदिवासी नेता डॉ. आनंद राय ने भी गुना जिला प्रशासन और राज्य सरकार को चेतावनी जारी की है। उन्होंने आर्टिकल 244 का हवाला देते हुए कहा कि मप्र में पेसा एक्ट लागू है, लेकिन अधिकारी अलग ही टशन में हैं। पीपलखेड़ी में ग्रामीण आदिवासी युवा सरपंच, पंचायत से अनुमति लेकर संविधान सम्मत, फ्रीडम फाइटर टंट्या भील की गाथा स्थापित कर रहे थे। क्षेत्रीय प्रशासन आयोजकों से आतंकवादियों की तरह व्यवहार कर रहा है। आनंद राय ने आरोप लगाया कि बंदूक की नोंक पर आयोजकों से लिखवाया गया कि वे आयोजन नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि मप्र के कोने-कोने से इतने आदिवासी पीपलखेड़ी पहुंचेंगे कि संविधान के आर्टिकल 13 (3) क, 244, पांचवीं अनुसूची, पेसा एक्ट सब समझा देंगे।