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Indore News: India will benefit by lakhs of crores, in this way farmers will also become rich!
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Indore News : भारत को होगा लाखों करोड़ का फायदा, इस तरह किसान भी हो जाएंगे मालामाल!
Video Desk Amar Ujala Published by: अंजलि सिंह Updated Thu, 09 Oct 2025 11:33 AM IST
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भारत अपनी कुल खाद्य तेल आवश्यकता का 60% से अधिक आयात करता है, जिस पर हर साल लगभग ₹1.7 लाख करोड़ विदेशी मुद्रा खर्च होती है। इस बढ़ती निर्भरता को कम करने का सबसे टिकाऊ उपाय है—देश में सोयाबीन उत्पादन को बढ़ावा देना। यह बात सोपा (Soybean Processors Association of India) के चेयरमैन डॉ. डेविश जैन ने इंटरनेशनल सोया कॉन्क्लेव 2025 में मीडिया से चर्चा के दौरान कही।
डॉ. जैन ने कहा, “सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर भारत तभी संभव है, जब देश आयल सीड्स और प्रोटीन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने। उच्च उत्पादकता और वैल्यू एडिशन से हम न केवल अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा बचा सकते हैं, बल्कि लाखों ग्रामीण युवाओं को रोजगार भी दे सकते हैं।”
बीज क्रांति: उत्पादकता दोगुनी करने का लक्ष्य
उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत की सोयाबीन उत्पादकता 1.1 टन प्रति हेक्टेयर है, जबकि वैश्विक औसत 2.6 टन है। SOPA का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में यह उत्पादकता 2 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंचे और 70% किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएं।
डॉ. जैन के अनुसार, “अगर प्रति हेक्टेयर सिर्फ 500 किलोग्राम की वृद्धि भी हो जाए, तो भारत अरबों रुपये के तेल आयात बचा सकता है।” उन्होंने इसे भारत की पोषण, कृषि और आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में निर्णायक कदम बताया।
हर थाली में सोया, हर घर में पोषण
सोयाबीन को “शक्ति का अन्न” बताते हुए उन्होंने सरकार से अपील की कि सोया फोर्टिफाइड आटा, सोया दूध, टोफू और सोया स्नैक्स को PDS, मिड-डे मील और पोषण अभियानों में शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा, “भारत में 60% लोग अनुशंसित मात्रा से कम प्रोटीन लेते हैं, जबकि सोया दालों से तीन गुना सस्ता और अधिक पौष्टिक विकल्प है।”
उन्होंने 2026 को “सोयाबीन वर्ष” घोषित करने की भी मांग की।
पशु आहार और निर्यात की मजबूती
डॉ. जैन ने बताया कि सोयामील ₹1.2 लाख करोड़ के पोल्ट्री, मत्स्य और पशुपालन उद्योग की रीढ़ है। उन्होंने निम्न गुणवत्ता वाले विकल्पों जैसे DDGS के बढ़ते प्रयोग पर चिंता जताई और सरकार से घरेलू उपयोग व निर्यात को प्रोत्साहित करने की नीति बनाने की अपील की।
भारत नॉन-जीएम (Non-GMO) सोया उत्पादों का विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता है। डॉ. जैन ने कहा कि SOPA ने सरकार से पाँच वर्षीय लक्ष्य तय करने का आग्रह किया है — उत्पादकता को 2 टन प्रति हेक्टेयर तक बढ़ाना, किसानों को उन्नत बीज देना, खाद्य तेल आयात में 25% कमी लाना, 2030 तक सोया फूड्स की खपत दोगुनी करना और नॉन-जीएम सोया व सोयामील के निर्यात में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी बढ़ाना।
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